सुनामी के 5 साल बाद

आचेह
Image caption आचेह की धीरज बंधाती महिलाएं

सुनामी की पाँचवीं बरसी ने तबाही की राख को एक बार फिर कुरेदा है. 26 दिसंबर 2004 को सुनामी की लहरों ने इंडोनेशिया से सोमालिया तक जो तबाही मचाई थी उसने लगभग ढाई लाख लोगों की जानें ले ली थीं.

हिंद महासागर के लगभग 14 देश सुनामी के प्रकोप का शिकार हुए थे.

सुनामी से सबसे ज़्यादा प्रभावित इंडोनेशिया के आचेह प्रांत में सुनामी ने लगभग 1 लाख 70 हज़ार लोगों की जानें ले लीं थी.

आचेह प्रांत में आज उस क़ब्रिस्तान में हज़ारों लोगों ने प्रार्थनाएं की, जहां दसियों हज़ार लोग सामूहिक रूप से दफ़नाए गए थे.

इंडोनेशिया में ही उस नौका के आसपास भी श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किए गए, जिसे सुनामी की लहरों ने उठा कर मीलों दूर एक दुमंज़िले मकान की छत पर पटक दिया था.

सुनामी में मारे गए अपने प्रियजनों की तस्वीरों को लिए शोकाकुल लोगों के साथ थाइलैंड में हज़ारों बौद्ध भिक्षुओं ने समुद्र तटों पर जाकर प्रार्थनाएं की.

फुकेत द्वीप पर हज़ारों सैलानी भी उस विनाशकारी सुनामी के दिन को याद करने के लिए जमा हुए.

फुकेत के पटांग बीच पर एकत्रित लोगों ने एक मिनट का मौन रख कर मृतकों को श्रद्धांजलि दी.

पुनर्निर्माण

बीबीसी संवाददाता करिश्मा वासवानी का कहना है कि इंडोनेशिया में अरबों डॉलरों की अंतरराष्ट्रीय सहायता ने पुनर्निर्माण अभियान को काफी तेज़ी दी.

उनका कहना था कि कि बांदाह आचेह का व्यवसायिक केंद्र, जो सुनामी से पूरी तरह तबाह हो गया था, अब चहल पहल और रौनक से भरा पूरा दिखता है, लेकिन पांच साल पहले की पीड़ा आचेह के लोगों के चेहरों पर आज भी उतनी ही ताज़ी है.

इंडोनेशिया के बाद सुनामी से सबसे ज्यादा तबाही हुई श्रीलंका में, जहां 40 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए और लगभग 5 लाख बेघर हो गए.

कोलंबो से बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड बताते हैं कि देश के दक्षिणी और पश्चिमी इलाकों में आज भी सुनामी की लहरों से काली पड़ी और तहस नहस हुई इमारतें देखी जा सकती हैं,

उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सहायता से श्रीलंका में काफी पुनर्निर्माण कार्य हुआ है, इसका एक उदाहरण वो नवनिर्मित गांव है जहां बेघर लोगों के लिए पहले एक हज़ार घर बनाए गए थे, लेकिन अब वहां एक स्वास्थ्य केंद्र भी बन गया है और गोताख़ोरों का प्रशिक्षण केंद्र भी खुल गया है.

सुनामी के क़हर से प्रभावित विभिन्न इलाकों में राहत और पुनर्निर्माण अभियान संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में आयोजित किए गए थे.

सुमात्रा के तट से उठी 9.2 की तीव्रता वाली सुनामी, पिछले 40 बरसों का सबसे भयंकर भूकंप था.

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