क्रिकेट में लड़कियों ने लड़कों को पछाड़ा

महिला क्रिकेट
Image caption क्रिकेट खेलती महिला टीम

लड़कों और लड़कियों के बीच वडोदरा में हुए पहले क्रिकेट मैच में लड़कियों ने लड़कों को पछाड़ दिया.

बीसीसीआई की तरफ़ से मान्यता प्राप्त डीके गायकवाड़ टूर्नामेंट का पहला अंडर-14 मैच लड़के और लड़कियों के बीच हुआ, जिसमें लड़कियों ने लड़कों के सामने अपनी क़ाबिलियत की मिसाल पेश करने का मौक़ा बिल्कुल नहीं गंवाया.

सोमवार और मंगलवार को हुए इस पहले मैच में लड़कियों ने पहली पारी में 134 रन बनाए, लेकिन लड़के 128 रन बनाकर ही ऑलऑउट हो गए. 6 रनों की इस बढ़त में लड़कियों ने दूसरी पारी में 38 रन और जोड़े.

हालांकि मैच ड्रा हो गया, लेकिन प्वाइंट सिस्टम के मुताबिक पहली पारी में बढ़त लेने वाले को ही उस मैच के प्वाइंट्स मिलते हैं.

लड़कियों की टीम की कप्तान तरन्नुम पठान तो फूली ही नहीं समा रहीं हैं. तरन्नुम ने कहा कि मैच खत्म होने के बाद ही उन्हें अहसास हुआ कि उन्होंने लड़कों को हराया है.

लड़कियों के कोच तुषार अरोथे ने लड़कियों को ये मौका दिया कि वे लड़कों के सामने अपनी महारथ साबित कर सकीं.

लड़कियाँ-लड़के आमने सामने

तुषार ने बोर्ड ऑफ क्रिकेट कंट्रोल इन इंडिया - बीसीसीआई को भारत में लड़कियों और लड़कों के बीच पहला क्रिकेट मैच खिलाने का प्रस्ताव पिछले साल रखा था क्योंकि तुषार को विश्वास था कि क्रिकेट के मैदान में भी लड़कियां लड़कों से कम नहीं.

साल भर बाद उन्हें इस मैच के लिए हरी झंडी मिल गई.

उनके मुताबिक इस मैच का मक़सद लड़कियों को नई चुनौतियौं से रूबरू कराना था, बल्कि तुषार ने कहा कि उन्होंने लड़कियों को इस मैच के लिए कुछ विशेष तैयारी भी नहीं करवाई, बस उन्हें अपना हुनर साबित करने की चुनौती दी गई.

इस मैच की सुर्खियों में रही मीडियम पेसर तस्लीम शेख़ और कप्तान तरन्नुम पठान.

तस्लीम ने 14.4 ओवर फेंके, जिनमें 9 मेडन रहे.

उन्होंने 5 विकेट झटकीं और सिर्फ 9 रन दिए. वहीं कप्तान तरन्नुम पठान की 46 रनों की पारी ने टीम को 135 के लक्ष्य तक पहुंचने में मदद की.

इस टूर्नामेंट में इन लड़कियों को अभी दो मैच खेलना बाक़ी हैं, लेकिन उन्हें ख़ुद पर भरोसा है कि आगे भी जीत ही मिलेगी.

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