मिस्र के कॉप्टिक ईसाइयों पर हमला

Image caption एक गिरजाघर के बाहर हुई गोलीबारी में सात लोगों के मारे जाने के बाद तनाव.

दक्षिणी मिस्र में एक गिरजाघर के बाहर हुई गोलीबारी में सात लोगों के मारे जाने के बाद सैकड़ों कॉप्टिक ईसाई प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़पें हुई हैं.

कॉप्टिक क्रिसमस की पूर्व संध्या पर हुई मध्यरात्रि प्रार्थना सभा के बाद जब लोग गिरजाघर से बाहर आ रहे थे तब मोटर साइकिलों पर सवार बंदूकधारियों ने उनपर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं.

समझा जाता है कि यह हमला एक ईसाई व्यक्ति द्वारा 12 साल की एक मुसलमान लड़की के साथ किए गए कथित बलात्कार का बदला लेने के लिए किया गया.

पिछले साल नवम्बर में इस बलात्कार के बाद पांच दिनों तक नागा हमादी नगर में दंगे होते रहे जिसमें ईसाइयों की सम्पत्ति को आग लगाई गई और नष्ट किया गया.

क़ाहिरा स्थित बीबीसी की संवाददाता का कहना है कि मरने वालों में से छह के शव लेने के लिए एक हज़ार से अधिक ईसाई अस्पताल में जमा हुए थे.

उन्होने अपना ग़ुस्सा उतारने के लिए सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके और एम्बुलेंस की गाड़ियों की तोड़फोड़ की.

बुधवार की रात तीन बंदूकधारी नागा हमादी के एक गिरजाघर के बाहर रुके और गोलियाँ बरसाने लगे जिसमें एक सुरक्षा अधिकारी और छह कॉप्टिक ईसाई मारे गए और 10 अन्य घायल हुए जिसमें दो मुसलमान हैं जो उधर से गुज़र रहे थे.

पुलिस का कहना है कि हमलावरों के नेता की पहचान कर ली गई है लेकिन अभी कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है.

गिरजाघर के बिशप काइरोलॉस का कहना है कि उन्हे क्रिसमस से पहले ऐसी धमकियां मिली थीं इसीलिए उन्होने मिडनाइट मिस्सा एक घंटे पहले समाप्त कर दिया था.

बिशप काइरोलॉस ने कहा, “कई दिनों से मुझे अंदेशा था कि क्रिसमस की पूर्व संध्या पर कुछ नहीं कुछ होगा”.

हमले से कुछ ही देर पहले वो गिरजे से निकले थे.

भेदभाव का शिकार

Image caption मिस्र का कॉप्टिक गिरजाघर

नागा हमादी नगर मिस्र के दक्षिणी शहर लक्सर से 40 मील दूर है. मिस्र की कुल 8 करोड़ की आबादी का 10% कॉप्टिक ईसाई हैं.

उनकी शिकायत है कि उन्हे हैरान परेशान किया जाता है और उनके साथ भेदभाव बरता जाता है.

कुछ का कहना है कि इससे पहले हुए हमलों के ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा नहीं हुई या फिर हल्की सज़ा हुई.

मिस्र के अधिकतर ईसाई कॉप्टिक हैं जो प्राचीन मिस्रवासियों के वंशज हैं.

ईसा मसीह की प्रकृति को लेकर पैदा हुए ब्रह्मविज्ञानी विवाद के बाद सन 451 में कॉप्टिक ईसाई पूर्वी ऑर्थोडॉक्स चर्च और रोमन कैथलिक चर्च से अलग हो गए थे.

लेकिन अब अधिकतर मामलों में उनके सिद्धांत पूर्वी ऑर्थोडॉक्स चर्च के सिद्धांतो से मेल खाते हैं.

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