ऑस्ट्रेलिया जानेवालों में भारी कमी

Image caption भारतीय छात्रों पर हमलों के ख़िलाफ़ लगातार प्रदर्शन होते रहे हैं.

ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में क़रीब 50 फ़ीसदी की गिरावट आई है.

पिछले साल सिडनी और मेलबर्न में भारतीय छात्रों पर हुए हमलों के बाद यह संख्या तेज़ी से गिरी है. इन हमलों के बाद दोनों देशों के राजनयिक संबंधों में कड़वाहट भी आई है.

इस साल दो जनवरी को मेलबर्न में नितिन गर्ग नाम के एक भारतीय छात्र पर चाकू से हमला किया गया था. उनकी अस्पताल में मौत हो गई थी.

छात्रों को परामर्श

इसे देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले और पढ़ने की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए यात्रा से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए थे.

ऑस्ट्रेलिया के प्रवासी मामलों के मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराए गए ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ छात्र वीज़ा के लिए आने वाले भारतीय आवेदनों की संख्या में 46 फ़ीसदी की गिरावट आई है.

इसके पीछे पिछले साल के शुरू में भारतीय छात्रों पर हुए हमलों और वहाँ के कुछ कॉलेज़ों और ट्रेवेल एजेंटों की धोखाधड़ी को कारण को कारण माना जा रहा है.

प्रवासी मामलों के मंत्रालय के ये आंकड़े पिछले साल जुलाई से अक्तूबर तक के हैं.

ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हुए इन हमलों का भारत में काफ़ी विरोध हो रहा है.

छात्रों को पढ़ने के लिए विदेश भेजने वाले एक भारतीय एजेंट के मुताबिक़ नितिन गर्ग की हत्या के बाद से ऑस्ट्रेलिया आने वाले भारतीय छात्रों की संख्या गिरेगी और वे दूसरे देशों के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का रुख़ करेंगे.

फ़ायदे का बाज़ार

इस भारतीय एजेंट के मुताबिक़ भारी फ़ायदे वाला यह बाज़ार पूरी तरह बरबाद हो गया है.

दूसरे देशों से आने वाले छात्र ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में 13 अरब डॉलर का योगदान देते हैं. कोयला और लौह अयस्क के बाद यह अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाला तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है.

इन हमलों के बाद इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि इससे ऑस्ट्रेलिया आने वाले भारतीय छात्रों की संख्या गिरेगी और इन आंकड़ों से यह आशंका सही साबित हुई है.

एक तिमाही में इंटरनेशनल छात्र वीज़ा की संख्या में गिरावट आई है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में आई मज़बूती या वीज़ा प्रक्रिया को और कड़ा करने का परिणाम हो सकता है.

वे यह भी स्वीकार करते हैं कि इससे ऑस्ट्रेलिया की साख भी प्रभावित हो सकती है ख़ासकर भारत में.

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