रुचिका का स्कूल दोषी: जाँच रिपोर्ट

रुचिका की तस्वीर के साथ उसकी मित्र आराधना
Image caption रुचिका के मामले में एसपीएस राठौर को छह महीने की सज़ा सुनाई है

रुचिका गिरहोत्रा के सेक्रेड हॉर्ट स्कूल के खिलाफ़ की गई दंडाधिकारीय जाँच में स्कूल को दोषी पाया गया है.

जाँच की ज़िम्मेदारी एसडीएम प्रेरणा पुरी को दी गई थी. इस जाँच रिपोर्ट को चंड़ीगढ़ के गृह सचिव राम निवास ने एक प्रेस कांफ्रेंस में जारी किया.

चंडीगढ़ प्रशासन की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सेक्रेड हॉर्ट स्कूल के नियमों के मुताबिक अगर स्कूल की फ़ीस समय पर नहीं जमा कराई जाए तो छात्र का नाम स्कूल से कट सकता है, पर जिस तरह से रुचिका को स्कूल से निकाला गया वो ग़लत था.

रिपोर्ट के अनुसार जिस साल रुचिका को फ़ीस जमा नहीं करने की वजह से स्कूल से निकाला गया, उसी साल कई और छात्रों ने फ़ीस जमा करने में देरी की थी. प्रशासन की रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि रुचिका के साथ भेदभाव किया गया.

चंड़ीगढ़ के गृह सचिव राम निवास ने कहा, "रुचिका को स्कूल से निकालना गलत था क्योंकि ये किसी व्यक्ति को खासतौर पर निशाना बनाने का मामला है.स्कूल के नियमों में ऐसा प्रावधान था कि फ़ीस जमा नहीं करने की सूरत में बच्चे का नाम स्कूल से कट सकता है, लेकिन इस नियम को ख़ासतौर पर किसी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया."

बाहरी दबाव

गृह सचिव ने रुचिका को स्कूल से निकालने पर किसी बाहरी दबाव की भी बात की.

राम निवास ने बताया कि स्कूल की इतिहास में कभी भी किसी छात्र को फ़ीस नहीं देने पर नहीं निकाला गया.

उन्होंने बताया कि रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई के लिए इसकी प्रति पंचकुला पुलिस, स्कूल मैनेजमेंट और सीबीएसई को भेज दी गई है.

रिपोर्ट के अनुसार रुचिका के साथ एक ही कक्षा में पढ़ने वाली एसपीएस राठौर की बेटी प्रियंजली राठौर ने भी समय पर फ़ीस नहीं दी थी, लेकिन उस पर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई.

प्रशासन के अनुसार इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए स्कूल की प्रिंसिपल, अध्यापकों और रुचिका के साथ पढ़ने वालों के साथ बातचीत की गई.

इस रिपोर्ट पर बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में चंडीगढ़ प्रशासन के वकील अनुपम गुप्ता भी मौजूद थे.

अनुपम गुप्ता का कहना था कि इस रिपोर्ट का एसपीएस राठौर के खिलाफ़ दायर मामले पर निश्चित रुप से असर पड़ेगा.

वो कहते हैं, "ये रिपोर्ट बताती है कि किस तरह से न सिर्फ़ व्यवस्था ने रुचिका के साथ नाइंसाफ़ी की बल्कि इस रिपोर्ट से ये भी साफ़ होता है कि कैसे रुचिका के साथ समाज ने भी इंसाफ़ नहीं किया."

ज़मानत

इस रिपोर्ट के अलावा गुरुवार को पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर को अग्रिम ज़मानत देने पर अदालत में सुनवाई हुई थी. इस मामले पर अदालत शुक्रवार को फ़ैसला देगी.

हरियाणा पुलिस ने राठौर की ज़मानत का विरोध नहीं किया है और न हीं पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने की मांग की है.

हरियाणा सरकार का कहना है कि उसने इस मामले की जाँच सीबीआई से कराने की मांग की है, लिहाज़ा राठौर को गिरफ़्तार करने का फ़ैसला भी सीबीआई करेगी.

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