कम जीते हैं आदिम प्रजाति के लोग

आदिम प्रजातियां
Image caption संयुक्त राष्ट्र ने आदिम प्रजातियों पर चौंकाने वाले आंकड़े प्रकाशित किए हैं

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट कहती है कि दुनिया के कई देशों में रहने वली आदिम प्रजाति के लोगों की आयु-संभाविता शेष जनसँख्या से कहीं कम है यानी वे दूसरों की तुलना में कम जीते हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने अपने इतिहास में पहली बार आदिम प्रजातियों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है. ये ऐसी जातियाँ हैं जो किसी भी देश के ज्ञात इतिहास में सबसे पुराने समय से रह रहीं हैं.

इस रिपोर्ट को तैयार करने वालों ने ये भी कहा है कि रिपोर्ट में कुछ डराने वाले आंकड़े प्रकाश में आए हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ओस्ट्रेलिया की आदिम प्रजाति और नेपाल में पाई जाने वाली किराती मूल प्रजाति के लोगों की औसत आयु अपने ही देश की दूसरी जनसँख्या से 20 वर्ष कम है.

जबकि कनाडा में रह रहीं फर्स्ट नेशन, इनुइत और मेतिस प्रजातियों का अनुमानित जीवन काल अपने देशवासियों से लगभग 17 वर्ष कम है.

संयुक्त राष्ट्र ने आदिम प्रजाति और उनके दूसरे देशवासियों के बीच मौजूद अमीरों और ग़रीबों के बीच की खाई को इस तरह के चौंकाने वाले आंकड़ों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.

रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि हालांकि आदिम प्रजाति दुनिया की पूरी आबादी का मात्र पाँच प्रतिशत हिस्सा हैं, लेकिन वे गाँवों में बसने वाली दुनिया की बेहद ग़रीब आबादी का एक तिहाई हिस्सा हैं.

औसत आयु कम होने के साथ ही इस रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है की दुनिया के तमाम देशों में रह रहीं इन आदिम प्रजातियों के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी बनी रहती हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने इसी रिपोर्ट के ज़रिये कुछ आदिम प्रजातियोंओ के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा की भी निंदा की है.

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