हेती में ईंधन की कमी से व्यवधान

हेती का अस्पताल
Image caption हेती और उसके पड़ोसी डोमिनिक रिपब्लिक में अस्पताल घायलों से भरे हुए हैं

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि हेती में ईंधन की सख़्त कमी के कारण मानवीय राहत कार्यों पर गंभीर असर पड़ सकता है.

संस्था ने कहा है कि ईंधन की कमी के कारण ना केवल सड़कों पर राहत सामग्रियों की आपूर्ति रूक सकती है बल्कि संपर्क के लिए अति महत्वपूर्ण मोबाईल फ़ोनों का नेटवर्क भी ठप्प हो सकता है.

इस बीच हेती में अमरीका के एक बड़े सैन्य अधिकारी ने कहा है कि उनके अनुमान से पिछले मंगलवार को आए भूकंप में मारे गए लोगों की संख्या दो लाख तक हो सकती है.

अमरीकी सैन्य अधिकारी लेफ़्टिनेंट जनरल केन कीन ने कहा है कि ये तबाही बहुत बड़ी थी मगर अभी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि इससे कितनी जनहानि हुई.

बचावकर्मियों ने हालाँकि इस सप्ताहांत कई लोगों को मलबों से जीवित निकाला लेकिन अभी तक लगभग 70 हज़ार शवों को दफ़नाया जा चुका है.

इस बीच राहत कार्य को बेहतर करने के प्रयास हो रहे हैं मगर संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि भूकंप को आए लगभग एक सप्ताह होने के बाद भी बेघर हुए लोगों के लिए ना तो तंबुओं का प्रबंध शुरू हो पाया है और ना ही चिकित्सा सामग्रियों की पर्याप्त आपूर्ति की जा सकी है.

संस्था ने कहा है कि हेती और उसके पड़ोसी डोमिनिकन रिपब्लिक में अस्पताल घायलों से भरे हुए है.

ईंधन का संकट

संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी चिंता ईंधन की कमी है जिसके अभाव में राहत कार्यों को जारी रहना असंभव होगा, साथ ही वहाँ राहतकर्मियों और स्वास्थ्य सेवा का अभाव है.

इससे पहले पोर्ट ओ प्रिंस पहुंचे संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र, अमरीका और दूसरी एजेंसियों के बीच ऐसे तालमेल की ज़रूरत है जिससे राहत सामग्री भंडारों में ही नहीं पड़ी रह जाए.

उन्होंने हेती के लोगों से अपील की है कि वो धैर्य बनाए रखें.

राहतकर्मी और अमरीकी सेना के जवान प्रभावित इलाक़ों में पानी और खाना बाँट रहे हैं.

लेकिन बेघर हुए हज़ारों लोग अभी भी राहत का इंतज़ार कर रहे हैं क्योंकि आपूर्ति माँग के हिसाब से बेहद कम है.

हेती के बंदरगाह बर्बाद हो चुके हैं, हवाई अड्डे पर भारी भीड़ है. डोमिनिकन रिपब्लिक में राहत सामग्री पहुँचाने वालों और शहर से बाहर निकलने वालों का तांता लगा हुआ है.

सेंटो डोमिंगो और पोर्ट ओ प्रिंस की दूरी महज 250 किलोमीटर है लेकिन राहत सामग्री से भरे ट्रकों को पहुँचने में वहाँ 18 घंटे लग रहे हैं.

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