श्रीलंका में राष्ट्रपति के लिए मतदान ख़त्म

श्रीलंका
Image caption श्रीलंका में राष्ट्रपति पद के लिए मतदान हो रहा है

श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों की हार के बाद हुए पहले राष्ट्रपति चुनाव में लाखों लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है.

मंगलवार को हुए मतदान में श्रीलंका के किसी हिस्से से हिंसा की कोई बड़ी ख़बर नहीं मिली.

बुधवार सुबह तक चुनाव परिणाम आने की संभावना है.

इस चुनाव में मुख्य मुक़ाबला मौजूदा राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और पूर्व सेना प्रमुख जनरल सनथ फ़ोनसेका के बीच है जिन्होंने तमिल विद्रोहियों को हराने में मुख्य भूमिका अदा की थी.

उन्हें पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंग समेत कुछ विपक्षी दलों का समर्थन हासिल है.

शुरूआत में ही राजधानी कोलंबो के नजदीक के मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें लग गईं थीं.

लंबे समय के बाद चुनाव के दौरान उत्तरी श्रीलंका के तमिल मतदाताओं पर एलटीटीई का कोई दबाव नहीं था जिसने चार साल पहले उन्हें चुनाव का बहिष्कार करने का आदेश दिया था.

राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने भरोसा दिलाया था कि चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से होंगे.

चुनाव प्रचार के दौरान दोनों ही प्रत्याशी ज़्यादातर बहुसंख्यक सिहंली समुदाय को ही ख़ुश करने की कोशिश में लगे रहे और दोनों ने ही तमिल विद्रोहियों को हराने में अपनी भूमिका को भुनाने की जमकर कोशिश की.

इसके अलावा दोनों ही प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार के दौरान एक दूसरे पर जमकर तीखे प्रहार किए.

राष्ट्रपति पद के लिए कुल 22 प्रत्याशी मैदान में हैं लेकिन मुख्य मुक़ाबला राजपक्षे और जनरल फ़ोनसेका के बीच ही माना जा रहा है.

अल्पसंख्यक वोट

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राजपक्षे और सरथ फ़ोनसेका दोनों ही बहुसंख्यक सिंहली समुदाय से हैं इसलिए इस चुनाव में अल्पसंख्यक वोट, ख़ासकर मुस्लिम मतदाताओं का वोट काफी अहम होगा.

Image caption मुख्य मुक़ाबला राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और जनरल फ़ोनसेका के बीच है

तमिलों के प्रमुख राजनीतिक समूह तमिल नेशनल एलांयस ने पहले ही जनरल फ़ोनसेका को समर्थन देने की घोषणा कर दी है.

ऐसी स्थिति में क़रीब सात प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं का रुझान काफी मायने रखता है.

क़रीब दो महीने तक चला चुनाव प्रचार शनिवार को बंद हो गया था. इस दौरान कुछ हिंसक वारदातें भी हुईं जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हुए.

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