'इस साल संभालेगी अफ़ग़ान सेना ज़िम्मा'

ब्राउन, बान की मून, डेविड मिलिबैंड और हामिद करज़ई
Image caption दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद करज़ई का ये पहला बड़ा अंतराष्ट्रीय सम्मेलन था. ऐसा ही एक सम्मेलन इस साल काबुल में भी होगा

अफ़ग़ानिस्तान में कुछ प्रांतों की सुरक्षा का दायित्व इस साल अफ़ग़ान सुरक्षाबलों को सौंप दिया जाएगा. अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य पर लंदन में हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इसकी घोषणा की गई है.

सम्मेलन में तय हुआ है कि अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा का दायित्व अफ़ग़ान सुरक्षाबलों को सौंपने की प्रक्रिया पाँच साल में पूरी कर ली जाएगी.

सम्मेलन की समाप्ति पर जारी की गई विज्ञप्ति में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान सरकार का लक्ष्य है कि तीन साल के भीतर देश के अधिकतर प्रांतों के सैन्य अभियानों का दायित्व अफ़ग़ान सुरक्षाबलों के हाथ में सौंप दिया जाए. साथ ही अफ़ग़ान सुरक्षाबल पाँच साल के भीतर उन प्रांतों की पूर्ण सुरक्षा सँभाल लेना चाहते हैं.

विज्ञप्ति में लिखा गया है कि अक्तूबर 2011 तक अफ़गानिस्तान में सेना और पुलिस को मिलाकर सुरक्षाबलों की संख्या को क्रमवार बढ़ाकर तीन लाख से अधिक कर दिया जाएगा और इसके लिए अंतररराष्ट्रीय समुदाय अफ़ग़ानिस्तान की मदद करेगा.

सम्मेलन में अफ़ग़ान सेना का आकार अक्तूबर 2011 तक बढ़ाकर 171,600 करने और पुलिसकर्मियों की संख्या 134,000 किए जाने पर सहमति हुई है.

इसके बाद अफ़ग़ान सुरक्षाबलों की संख्या वहाँ तैनात अंतरराष्ट्रीय गठबंधन सेना की संख्या से अधिक हो जाएगी.

सम्मेलन के लिए जुटे 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने तालेबान के लोगों को लुभाकर मुख्यधारा में लाने के लिए अफ़ग़ानिस्तान को 14 करोड़ डॉलर की सहायता देने का भी वचन दिया.

लंदन में हुए एक दिन के अफ़ग़ान सम्मेलन में लगभग 70 देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया जिनमें भारत के विदेश मंत्री भी शामिल थे.

लंदन सम्मेलन के बाद इसी वर्ष अब काबुल में एक सम्मेलन होगा जिसमें प्रगति की समीक्षा की जाएगी.

सम्मेलन की समाप्ति पर ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लंदन सम्मेलन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अब एक स्पष्ट लक्ष्य रख दिया है.

मिलिबैंड ने कहा,"आज यहाँ से जो भी 65 या 70 विदेश मंत्री लौटेंगे उनके सामने ना केवल चुनौतियों को लेकर स्पष्टता होगी बल्कि उन्हें ये भी पता होगा कि कैसे अफ़ग़ानिस्तान सरकार उन चुनौतियों का अंतरराष्ट्रीय सहयोग से सामना कर सकेगी".

सैनिक ज़िम्मेदारी

Image caption सम्मेलन का उदघाटन करते गॉर्डन ब्राउन

लंदन में अफ़ग़ानिस्तान सम्मेलन का उदघाटन बिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने किया और उन्होंने तभी अपने भाषण में कह दिया कि अफ़ग़ानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सेना इस वर्ष से सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अफ़ग़ान सुरक्षाबलों को सौंपना शुरू कर देगी.

उन्होंने कहा कि ये समय अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य के लिए एक निर्णायक समय है.

उन्होंने कहा,"अगले वर्ष के मध्य तक हमें चरमपंथ की लड़ाई के लिए जारी ज्वार की दिशा बदलनी होगी".

अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने भी कहा कि अफ़ग़ान सुरक्षाकर्मी अगले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय सेना से और दायित्व लेने के लिए तैयार है.

उन्होंने कहा,"अगले दो-तीन वर्ष में हम धीरे-धीरे देश के बड़े हिस्से की सुरक्षा का दायित्व लेना चाहते हैं. इससे हमारे अंतरराष्ट्रीय सहयोगी अंततः अपने सैनिकों को उन हिस्सों से हटा लेंगे जहाँ की सुरक्षा हमारी सेना संभाल चुकी होगी".

भ्रष्टाचार और तालेबान

Image caption दूसरे कार्यकाल में करज़ई का पहला सम्मेलन

राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने सम्मेलन में अपने भाषण में कहा कि अपने दूसरे कार्यकाल में उनका मुख्य लक्ष्य भ्रष्टाचार से लड़ना रहेगा.

पिछले वर्ष दोबारा राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद से हामिद करज़ई पहली बार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे.

उन्होंने अपने भाषण में अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य के लिए छह सूत्री योजना का उल्लेख किया और कहा कि उनकी कार्य योजना का मुख्य लक्ष्य सुशासन और भ्रष्टाचार से लड़ाई पर ध्यान देना रहेगा.

उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा को बेहतर करना भी उनकी प्राथमिकता है और निर्दोष लोगों की जान ना जाए ये सुनिश्चित करने के लिए और बहुत कुछ किए जाने की ज़रूरत है.

करज़ई ने कहा कि उनकी सरकार ऐसे चरमपंथियों तक पहुँचना चाहती है जिनका अल क़ायदा या दूसरे चरमपंथी गुटों के साथ संबंध नहीं है.

उन्होंने सउदी अरब के शाह अब्दुल्ला से फिर आह्वान किया कि वे अफ़ग़ानिस्तान में शांति प्रक्रिया में हाथ बँटाएँ.

सउदी अरब के शासकों के तालिबान के वरिष्ठ नेताओं के साथ अच्छे संपर्क हैं और तालेबान के साथ गुप्त बातचीत में भूमिका निभाते रहे हैं.

करज़ई ने भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए जो उपाय सुझाए हैं उनमें एक महत्वपूर्ण सुझाव एक निगरानी दल बनाने का है जिसमें दुनिया भर से भ्रष्टाचार की रोकथाम करने में निपुण विशेषज्ञ रहेंगे.

अफ़ग़ानिस्तान सरकार ने लंदन सम्मेलन में बताया कि वो इस साल काबुल में होनेवाले सम्मेलन से पहले देश में सहमति के लिए वहाँ एक लोया जिर्गा या महासभा बुलाएगी जिसमें अफ़ग़ानिस्तान के विभिन्न गुटों और वर्गों और प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाया जाएगा.

संबंधित समाचार

संबंधित इंटरनेट लिंक

बीबीसी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है