कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की घोषणा

एसएम कृष्णा
Image caption कृष्णा ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में अब चुनौती राष्ट्रीय संस्थानों को तैयार करने की है

भारत ने अफ़ग़ानिस्तान के साथ कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दो नए कार्यक्रमों की घोषणा की है. इसके तहत बड़ी संख्या में अफ़ग़ान छात्र भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे.

लंदन में अफ़ग़ान सम्मेलन के बाद जारी बयान में भारतीय विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने इन कार्यक्रमों की घोषणा की.

कृष्णा ने एक बयान में कहा, "अगले पाँच वर्षों तक हम हर वर्ष 100 अफ़ग़ान छात्रों को भारतीय विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट स्तर की पढ़ाई के लिए फ़ेलोशिप देंगे. इसी के साथ हर साल 200 अफ़ग़ान छात्रों के लिए भारतीय संस्थानों में कृषि और संबंधित क्षेत्रों में डिग्री स्तर की पढ़ाई की भी व्यवस्था की जाएगी."

कृष्णा ने कहा कि भारत की ये पहल अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के विकास के प्रति उसकी वचनबद्धता को दर्शाती है.

भारत की ताज़ा पहल पर रोशनी डालते हुए अफ़ग़ानिस्तान में भारत के राजदूत जयंत प्रसाद ने लंदन में संवाददाताओं को बताया कि भारत की मूल योजना तो अफ़ग़ानिस्तान में एक कृषि विश्वविद्यालय स्थापित करने की थी, लेकिन इसके लिए पर्याप्त संख्या में कृषि विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है. इसलिए अब भारत ने अगले पाँच वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान के लिए डेढ़ हज़ार कृषि विशेषज्ञ तैयार करने का दायित्व लिया है.

जयंत प्रसाद अफ़ग़ान सम्मेलन में भारतीय वार्ताकारों के दल में शामिल थे. उन्होंने सम्मेलन के घोषणा-पत्र पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इसके लिए मेज़बान ब्रिटेन ने लगातार भारत से विचार-विमर्श किया और इसमें भारत की भावनाओं को जगह दी गई है.

शांति और मेलमिलाप कार्यक्रम

प्रसाद ने कहा कि पूर्व तालेबान विद्रोहियों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए शांति और मेलमिलाप के जिस कार्यक्रम की घोषणा की गई है उसमें भारत द्वारा प्रस्तावित शर्तों को जगह दी गई है.

उन्होंने कहा, "भारत ने जो दो मुख्य सुझाव दिए थे उसे लंदन घोषणा-पत्र में जगह मिली है. ये सुझाव पारदर्शिता और समाविष्टि के बारे में थे. पारदर्शिता का मतलब ये है कि पूर्व विद्रोहियों से जो भी बात हो उसके बारे में अफ़ग़ानिस्तान की सरकार समाज के हर वर्ग को विश्वास में ले. समाविष्टि का मतलब ये है कि शांति और मेलमिलाप का कार्यक्रम सिर्फ़ पश्तून समुदाय के लिए ही नहीं हो, बल्कि अफ़ग़ानिस्तान के हर जातीय समूह को इसमें शामिल किया जाए."

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम के तहत तालेबान से किसी तरह की बात नहीं की जाएगी, बल्कि इसमें व्यक्तिगत स्तर पर उन लोगों से बातचीत होगी जो कि किसी कारण से सरकार के ख़िलाफ़ हैं. प्रसाद के अनुसार हिंसा और चरमपंथी विचारधारा को छोड़ने और अफ़ग़ानिस्तान के संविधान को अपनाने वाले लोग ही इस कार्यक्रम में शामिल हो सकेंगे.

पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए भारतीय राजदूत ने कहा, "घोषणा-पत्र से उस हिस्से को हटाने की कोशिश की गई थी जिसमें कि आतंकवादी नेटवर्क को सैनिक, वित्तीय और वैचारिक सहयोग के तंत्र को ख़त्म करने का उल्लेख है. लेकिन ये कोशिश क़ामयाब नहीं हो सकी."

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यदि अफ़ग़ानिस्तान सरकार की तरफ़ से वहाँ की सेना और पुलिस को प्रशिक्षित करने का अनुरोध आता है तो भारत निश्चय ही उस पर विचार करेगा.

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