गांधीवाद की प्रासंगिकता पर बहस

राजमोहन गांधी
Image caption गांधी

स्वाधीनता आंदोलन में महात्मा गांधी की तमाम उपलब्धियों के बीच एक उपलब्धि यह भी थी कि उन्होंने अपने कुछ ऐसे अनुयायी तैयार किए जो अपने क्षेत्र में दक्ष थे.

ये अनुयायी राजनीति के क्षेत्र में भी थे और रचनात्मक क्षेत्र में भी. रचनात्मक कार्यक्रमों के लिए उन्होंने जिन लोगों को महत्वपूर्ण दायित्व दिए उनमें थे जे बी कृपलानी, ज़ाकिर हुसैन और जे सी कुमारप्पा.

जे सी कुमारप्पा बड़े अर्थशास्त्री थे और गांधी जी ने उन्हें कृषि अर्थव्यवस्था को बहाल करने का काम सौंपा. यह महज़ संयोग ही है कि तीस जनवरी को ही कुमारप्पा की भी बरसी होती है.

नई दिल्ली में जब कुमारप्पा की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में लोग जुटे तो गांधी जी और उनके विचार, ख़ासकर ग्राम स्वराज और कुछ अन्य आर्थिक मुद्दों पर उनकी बातें लोगों को याद आईं और आज के परिप्रेक्ष्य में उनकी प्रासंगिकता पर बहस हुई.

योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहन धारिया का ने कहा, ''ये बड़े दुख की बात है कि गांधी के विचारों को उन्हीं के अनुयायियों ने ख़त्म कर दिया लेकिन बदलती परिस्थितियों में उनकी बातें एक बार फिर प्रासंगिक हो गई हैं.''

महात्मा गाँधी के पौत्र और वरिष्ठ पत्रकार राजमोहन गाँधी का कहना था कि देश की योजनाओं में गाँधी जी के विचारों को अमल में न लाने के लिए किसी एक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.

उन्होंने कहा कि इसके लिए देश के राजनेता भी ज़िम्मेदार हैं और हम खुद भी जिम्मेदार हैं.

राजमोहन गाँधी का कहना था, ''भारत के ग़रीब को अगर हम भूल जाते हैं तो दुनिया में लोग चाहे जितनी हमारी तारीफ़ करें उसका कोई फ़ायदा नहीं मिलेगा और दुनिया में लोग हमारा आदर भी नहीं करेंगे.''

कार्यक्रम में जे सी कुमारप्पा की आर्थिक नीतियों, महात्मा गांधी के विचारों पर उनके प्रभावों और आज के समय में उनकी ज़रूरतों पर चर्चा हुई.

राष्ट्रीय लोकदल के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह का कहना था कि हाल के दिनों में जिस तरह से दुनिया भर के बैंक दिवालिया हुए और दुनिया भर में अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुज़री उसे देखते हुए फिर से हमें गाँधी जी के विचारों पर अमल करना होगा.

प्रेक्षकों का कहना है कि बौद्धिक स्तर पर गांधीवाद की उपयोगिता पर बहस ज़रूर शुरू हुई है लेकिन ये कितनी सार्थक है ये तो तभी पता चलेगा जब इसे व्यवहार में लाया जाएगा.