कार्बन कटौती के प्रस्ताव सौंपे गए

कोपेनहेगन सम्मेलन
Image caption कोपेनहेगन समझौते में कोई सामूहिक लक्ष्य निर्धारित नहीं हो सका था.

ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने की योजना से अवगत कराने की समयसीमा रविवार देर रात ख़त्म हो गई है.

ये समयसीमा हाल ही में जलवायु परिवर्तन पर हुए कोपेनहेगन सम्मेलन में तय की गई थी.

भारत, चीन समेत ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के लिए 80 फ़ीसदी ज़िम्मेदार देशों ने अपनी योजनाओं से संयुक्त राष्ट्र को अवगत करा दिया है.

भारत और चीन ने उत्सर्जन कटौती के लक्ष्य सौंप दिए हैं लेकिन ये कोपेनहेगन समझौते को पूर्ण समर्थन देने से बच रहे हैं.

भारत ने स्वैच्छिक कटौती का लक्ष्य सौंपा

अमरीका और यूरोपीय संघ ने कार्बन उत्सर्जन में बीस फ़ीसदी तक कटौती की प्रतिबद्धता जताई है लेकिन दोनों ने इसका आकलन अलग-अलग तरीके से किया है.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि ज़्यादातर देशों में कोपेनहेगन समझौते को निराशाजनक माना जा रहा है. हालाँकि जिस तरह का समर्थन इस समझौते को मिला है, उससे उम्मीद जगी है कि इस साल के अंत में होने वाले एक और जलवायु सम्मेलन में क़ानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता अमल में आ सकता है.

ऐसा लग रहा है कि जलवायु परिवर्तन के नुकसानों को भुगत रहे कई विकासशील देश समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हो गए हैं क्योंकि इस समझौते के तहत विकासशील देशों को आर्थिक मदद का आश्वासन दिया गया है.

कुछ देश असंतुष्ट

Image caption जलवायु परिवर्तन पर कई देश समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हो गए हैं

लेकिन कुछ देश इस प्रावधान से असंतुष्ट हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ये समझौता बाद में कार्बन उत्सर्जन में कटौती को लेकर क़ानूनी तौर पर बाध्यकारी समझौता करने के लिए एक नया आधार बन सकता है.

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सचिवालय ने कहा है कि वो सोमवार को इस पर हस्ताक्षर करने वाले तमाम देशों की सूची जारी कर देगा.

दुनिया में सबसे ज़्यादा उत्सर्जन करने वाले देश जैसे अमरीका, चीन और भारत ने समझौते पर पहले ही हस्ताक्षर कर दिए हैं. कम उत्सर्जन करने वाले देशों ने भी खुद को इस समझौते से जोड़ने का आश्वासन दिया है.

कोपेनहेगन में विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले नुकसान से निपटने के लिए तीस अरब डॉलर की आर्थिक मदद दिए जाने का निर्णय लिया गया था.

लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि तापमान में वृद्धि को दो डिग्री तक सीमित रखने की संभावना बहुत ही कम है.

पर्यावरणविदों और मदद पहुँचाने वाली संस्थाओं ने कोपेनहेगन सम्मेलन को विफल घोषित कर दिया है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इस समझौते को एक ज़रूरी शुरुआत की संज्ञा दी है.

बीबीसी के पर्यावरण संवाददाता मैक मैग्राथ के अनुसार इस समझौते में कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किए गए हैं, लेकिन साथ ही उनका कहना है कि अगर ज़्यादातर देश केवल इस बात के संकेत देते हैं कि वो उत्सर्जन कटौती के लिए क्या करने के इच्छुक हैं तो पहली बार ऐसा होगा कि संयुक्त राष्ट्र के पास तमाम देशों के लिखित आश्वासन होंगे.

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