शायद खुल सकेंगे फ़ौज के समलैंगिक

Image caption अमरीकी फ़ौज में समलैंगिक अपनी असलियत सामने नहीं ला सकते.

अमरीकी फ़ौज एक ऐसी योजना पर काम कर रही है जिसके तहत फ़ौज में भर्ती समलैंगिक खुल कर रह सकेंगे.

वर्तमान नीति “पूछो नहीं, बताओ नहीं’’ पर चलती है यानि किसी सैनिक से इस बारे में पूछा नहीं जाएगा और ना ही वो खुद बताएगा.

अगर ये बात सार्वजनिक होती है तो उस सैनिक की नौकरी बर्खास्त की जा सकती है और इसलिए समलैंगिक सैनिकों को ये जानकारी गुप्त रखनी होती है.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमरीकी संसद से अपील की है कि वो इस क़ानून को ख़त्म करे.

ये नीति रूढ़िवादी अमरीका को ध्यान में रखते हुए एक तरह की समझौते की नीति थी जिसपर राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने हस्ताक्षर करके इसे क़ानून बनाया.

साल 1993 में आए इस क़ानून के बाद से अबतक 13,000 ऐसे फ़ौजियों की नौकरियां जा चुकी हैं जिनके समलैंगिक होने की बात सामने आ गई.

बराक ओबामा की पहल पर अब रक्षा मंत्री और वरिष्ठ अमरीकी कमांडर एक योजना पेश करेंगे जिसमें इस पर ग़ौर किया जाएगा कि क्या, कब और कैसे ये नीति बदली जा सकती है.

बड़ी चुनौती

वाशिंगटन से बीबीसी संवाददाता स्टीव किंगस्टोन का कहना है कि इसे बदलना आसान नहीं होगा.

कई वरिष्ठ अधिकारी निजी बातचीत में कहते हैं कि फ़ौज में समलैंगिकों का खुलकर रहना दूसरों के लिए असहजता और अविश्वास पैदा कर सकता है.

कुछ लोगों का ये भी कहना है कि ऐसे समय में ये विवादास्पद बदलाव सही नहीं होगा क्योंकि अमरीका दो युद्दों में शामिल है.

लेकिन इसके समर्थकों का कहना है कि अभी इस नियम में बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि कई अधिकारी, जिनमें कई अरबी अनुवादक भी शामिल हैं, सिर्फ़ इसलिए अपनी नौकरी खो रहे हैं क्योंकि उनकी यौन रूचि दूसरों से अलग है.

राष्ट्रपति ओबामा के लिए ये एक बड़ी चुनौती होगी क्योंकि वामपंथी रूझान वाले उनके कई समर्थक अब अपना धैर्य खो रहे हैं.

संबंधित समाचार