म्यूनिख में ईरान पर खींचतान

यूकिया अमानो
Image caption यूकिया अमानो ईरान के प्रस्ताव से सहमत नहीं

संयु्क्त राष्ट्र परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए के प्रमुख यूकिया अमानो ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत तेज़ करने को कहा है.

इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री मनुचेहर मोत्तकी ने कहा था कि म्यूनिख में आईएईए के प्रमुख यूकिया अमानो के साथ उनकी सार्थक बैठक हुई है, जिसमें कई मुद्दों सहित प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय समझौते पर भी बातचीत हुई.

लेकिन आईएईए प्रमुख ने इस बातचीत को कोई ख़ास महत्व न देते हुए यही कहा है कि ईरान ने कोई नई बात नहीं कही है.

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को मोत्तकी ने ये कहा था कि ईरान परमाणु ईंधन के बदले कम संवर्धित यूरेनियम बाहर भेजने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौते पर सहमति के बहुत क़रीब है.

लेकिन म्यूनिख के सुरक्षा सम्मेलन में ईरानी विदेशमंत्री मोत्तकी ने परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समझौते की तरफ़ अपनी पहल को अभी तक बरक़रार रखा है.

लेकिन पश्चिमी देशों ने ईरान के इस दावे पर संदेह जताया है.

अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने कहा, “मुझे ऐसा नहीं लगता कि ईरान इस समझौते के क़रीब है.”

अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल जेम्स ने ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी भी दी.

जर्मनी के विदेश मंत्री गुइडो वैस्टरविल ने म्यूनिख के सुरक्षा सम्मेलन में कहा है, “हम ईरान की ओर मदद का हाथ बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन हमारा हाथ सिर्फ़ शून्य से होकर ख़ाली लौट आता है.”

'वही पुरानी चाल'

ब्रिटन के रक्षा मंत्री बॉब एंसवर्थ ने कहा है कि ईरान की ये वही पुरानी चाल है.

इस समझौते की प्रमुख बात ये है कि अनुसंधान कार्यों के लिए बनाए गए अपने एक रिएक्टर के लिए परमाणु ईंधन मिलने की शर्त पर ईरान अपने यूरेनियम का अधिकतर हिस्सा विदेशों में भेजने को तैयार होगा.

पिछले साल अक्तूबर में पश्चिमी महाशक्तियों ने ईरान को ये प्रस्ताव दिया था कि वो अपने अनुसंधान रिएक्टरों के लिए ईंधन विदेशों से ले सकता है लेकिन उसके बदले में उसे पहले से संवर्धित अपना यूरेनियम विदेशों में भेजना होगा.

इस प्रस्ताव में कहा गया था कि रूस और फ़्रांस ईरान से कम संवर्धित यूरेनियम लेंगे और उसे उच्च स्तर पर संवर्धित करके ईंधन की छड़ों में बदल कर वापस देंगे. इन ईंधन के छड़ों को ईरान अपने तेहरान स्थित अनुसंधान रिएक्टरों मे इस्तमाल करना चाहता है.

इस प्रस्ताव पर बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने इस पर अपना रुख़ स्पष्ट करते हुए कहा कि इस प्रस्ताव को मानने का अर्थ ये नहीं लगाया जाना चाहिए कि ईरान अपना यूरेनियम संवर्धन बंद कर देगा.

उल्लेखनीय है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमरीका और पश्चिमी देशों के बीच गहरे मतभेद रहे हैं.

पश्चिमी देश आरोप लगाते हैं कि ईरान परमाणु बम बनाने की तैयारी कर रहा है जबकि ईरान कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है.

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