इराक़ में चुनाव अभियान शुरू

इराक़
Image caption क़रीब 500 उम्मीदवारों पर पाबंदी लगाई गई है

इराक़ में शिया-सुन्नी तनाव के बीच चुनाव अभियान शुरू हो रहा है, करबला में अरबाइन या चहेल्लुम के मौक़े पर जमा हुए शिया तीर्थयात्रियों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाए जाने के बाद दोनों समुदायों के रिश्तों में और कड़वाहट आई है.

दूसरा बड़ा सवाल है बड़ी संख्या में लोगों को चुनाव लड़ने से रोका जाना. अभी बहुत स्पष्ट नहीं है कि कौन लोग चुनाव लड़ पाएँगे.

जिन लोगों को चुनाव लड़ने से रोका गया है उनमें शिया-सुन्नी दोनों समुदायों के लोग शामिल हैं, लेकिन अल्पसंख्यक सु्न्नी समुदाय के लोगों को लगता है कि शिया नेताओं के दबदबे वाली सरकार उनका हक़ उनसे छीनने की साज़िश कर रही है.

छिन्न-भिन्न हो चुकी है सद्दाम हुसैन की बाथ पार्टी आज भी इराक़ में एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है.

जो लोग सद्दाम हुसैन के ज़माने में बाथ पार्टी की ज्यादतियों का शिकार हुए हैं वे इस बात की चर्चा से ही परेशान हो जाते हैं कि उस पार्टी से जुड़ा रहा कोई व्यक्ति संसद में पहुँच सकता है.

कम ही लोगों को ये ख़याल है कि बाथ पार्टी की राजनीतिक विचारधारा धर्मनिरपेक्ष अरब राष्ट्रवाद की रही है और कई लोग कहते हैं यह पार्टी सद्दाम हुसैन के सत्ता में आने से पहले सक्रिय रही है और जिन लोगों ने गुनाह किए हैं उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए न कि पार्टी से जुड़े हर व्यक्ति को.

इराक़ में इस बार चुनाव का मुख्य मुद्दा क्या है, यह सवाल कुछ ठीक नहीं है क्योंकि चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा ख़ुद चुनाव ही है.

इन चुनावों को कितने लोग पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और उचित प्रतिनिधित्व देने वाला मानते हैं, यही सबसे अहम बात है. एकदलीय प्रणाली से लोकतंत्र की तरफ़ कोई देश जब क़दम बढ़ाता है तो चुनाव की निष्पक्षता पर ही इस प्रक्रिया की कामयाबी निर्भर करती है.

इराक़ में अगर अगले महीने होने वाले चुनाव में अगर गड़बड़ियाँ हुईं तो देश में पहले से ही विभाजित शिया-सुन्नी समुदाय में बीच की खाई और गहरी हो जाएगी.

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