ईरान पर दबाव की कोशिश तेज़

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन खाड़ी देशों की यात्रा पर रवाना होने वाली हैं. यात्रा का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने के लिए अरब देशों का समर्थन हासिल करना है.

हिलेरी क़तर में अमरीका-इस्लामी वर्ल्ड फ़ोरम की सालाना बैठक को संबोधित करेंगी. उनका तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तैय्यप अर्दोगान से भी मिलने का कार्यक्रम है. तुर्की ईरान पर प्रतिबंधों का विरोध करता है.

इस तीन दिवसीय यात्रा में हिलेरी पहली बार सऊदी अरब का दौरा करेंगी. अमरीका खाड़ी देशों में कूटनीतिक कोशिश से ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है. अमरीका चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ईरान पर चौथे दौर के प्रतिबंध लगाए.

ईरान का कहना है कि इसके परमाणु कार्यक्रम का उद्देश्य बिजली उत्पादन है ताकि यह अपने क़ीमती तेल व गैस की ज़्यादा से ज़्यादा मात्रा निर्यात कर सके. लेकिन पश्चिमी देशों को संदेह है कि इस बहाने वह अपने परमाणु हथियारों को विकसित करने की कोशिश कर रहा है.

उम्मीद की जा रही है कि हिलेरी क्लिंटन की यात्रा के दौरान अरब-इसराइल शांति प्रक्रिया को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश भी होगी.

क़तर में हिलेरी प्रधानमंत्री शेख हमद बिन जासिम अल-थानी से भी मुलाक़ात करेंगी. सऊदी अरब में वे शाह अब्दुल्लाह और विदेश मंत्री प्रिंस सउद अल-फ़ैसल से बातचीत करेंगी.

हिलेरी के साथ यात्रा कर रहे एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि अमरीका सउदी अरब से उम्मीद करता है कि वह चीन को इस बात के लिए राज़ी करे कि चीन ईरान के ख़िलाफ़ कड़े प्रतिबंध लगाए जाने का विरोध छोड़ दे.

सउदी अरब और चीन के बीच बेहतर कारोबारी संबंध हैं.

हिलेरी की यात्रा के पहले सहायक विदेश मंत्री जेफ़्री फ़ेल्टमैन ने पत्रकारों से बताया, "इस यात्रा के ज़रिए हम उम्मीद करते हैं कि सउदी अरब अपने संबंधों का इस्तेमाल करेगा जिससे ईरान पर दबाव डालने में मदद मिलेगी."

चीन का डर

हिलेरी क्लिंटन के साथ यात्रा कर रहे बीबीसी संवाददाता किम घटास का कहना है कि चीन को इस बात का डर है कि ईरान में निवेशों से मिलने वाले राजस्व का बड़े पैमाने पर नुक़सान होगा और ईरान से उसे मिलने वाले तेल की आपूर्ति ठप पड़ जाएगी.

उम्मीद की जा रही है कि अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन सऊदी अरब पर इस बात के लिए दबाव डालेंगी कि चीन को अगर तेल की आपूर्ति में बाधा आएगी तो सऊदी अरब इस रूकावट को दूर करेगा.

बातचीत का एक और मुद्दा मिसाइल सुरक्षा प्रणाली होगा.

अमरीका के राजनैतिक मामलों के विदेश उप मंत्री विलियम बर्न्स सोमवार को लेबनान और सीरिया की यात्रा करेंगे.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीका को अब भी उम्मीद है कि वह सीरिया और ईरान के बीच संबंधों को कमज़ोर कर सकता है.

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