ईरान पर प्रतिबंध हल नहीं: सऊदी

सऊद अल फ़ैसल के साथ हिलेरी क्लिंटन
Image caption अमरीकी चीन को राज़ी करने के लिए सऊदी मदद ले रहा है

सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान के ख़िलाफ़ और प्रतिबंध लगाने से परमाणु समस्या का तुरंत कोई हल निकलेगा.

शाहज़ादे सऊद अल फ़ैसल ने कहा है कि ईरान से जो ख़तरा है उसके लिए प्रतिबंध की बजाय तात्कालिक हल की ज़रूरत है.

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के साथ रियाध में उन्होंने यह बात कही. इससे पहले हिलेरी क्लिंटन ने कहा था कि 'ईरान सैन्य तानाशाही' बन रहा है.

इस बीच तुर्की सरकार ईरान के साथ एक समझौता करने की कोशिश कर रही है जिससे उसके ख़िलाफ़ और प्रतिबंध को टाला जा सके.

इसके लिए तुर्की के विदेश मंत्री ईरान जा रहे हैं.

और प्रतिबंध

शाहज़ादे सऊद अल फ़ैसल ने रियाध में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, "प्रतिबंध लंबे समय के लिए हल है. हो सकता है कि यह काम करता हो. हम कह नहीं सकते."

उन्होंने कहा, "लेकिन हमें कम समय में परिणाम चाहिए क्योंकि हम ख़तरे के क़रीब हैं...इसलिए हमें कोई तात्कालिक हल चाहिए न कि कोई क्रमिक हल."

अमरीकी अधिकारी के साथ यात्रा कर रहे बीबीसी के संवाददाता किम घटास का कहना है कि सऊदी विदेश मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह तत्कालिक हल क्या हो सकता है.

उनका कहना है कि हो सकता है कि इस विकल्प पर हिलेरी क्लिंटन और शाह अब्दुल्ला के बीच बंद दरवाज़ों के पीछे चर्चा हुई हो.

हिलेरी क्लिंटन इस समय खाडी़ देशों की यात्रा पर हैं ताकि वे ईरान के ख़िलाफ़ और प्रतिबंधों के लिए समर्थन जुटा सकें.

उन्होंने कहा है कि वे चाहती हैं कि सऊदी अरब चीन को इस बात के लिए राज़ी करे कि वह ईरान के ख़िलाफ़ कड़े क़दमों का समर्थन करे.

उल्लेखनीय है कि चीन सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य है और उसके पास वीटो पॉवर है. चीन इस समय ईरान के ख़िलाफ़ और प्रतिबंध लगाए जाने के ख़िलाफ़ है.

चीन को लगता है कि और प्रतिबंध लगाए जाने से उसे ईरान में किए गए निवेश में घाटा होगा.

सऊदी विदेश मंत्री ने यह भी कहा है कि मध्य पूर्व को परमाणु हथियार से मुक्त करने के प्रयासों में इसराइल को भी शामिल किया जाना चाहिए.

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