वर्ष 2009 में 70 पत्रकारों की हत्या

वर्ष 2009 पत्रकारों के लिए घातक साबित हुआ है और इस दौरान कुल 70 पत्रकारों को अपनी जान गंवानी पड़ी.

पत्रकारों की रक्षा के लिए बनी समिति (सीजेपी) ने ये आँकड़ें देते हुए कहा है कि पिछले 30 सालों में पत्रकारों के लिए वर्ष 2009 सबसे ख़राब रहा है.2007 में कुल 67 पत्रकारों की हत्या हुई थी.

फ़िलिपींस में 31 पत्रकारों की हत्या के कारण 2009 में आँकड़ा 70 तक पहुँच गया.

वर्तमान में कुल 150 पत्रकार जेल में है जिसमें ईरान के 60 लोग शामिल हैं. सीजेपी का कहना है कि शासन ने ईरान में पत्रकारिता का अपराधीकरण कर दिया है.

गुट के मुताबिक ऑनलाइन पत्रकार ख़ासकर दमन का ज़्यादा शिकार होते हैं.

ऑनलाइन पत्रकारों पर ज़्यादा ख़तरा

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रेस पर 2009 में हुए हमलों के कारण जितने पत्रकार विश्व की विभिन्न जेलों में बंद हैं उनमें से आधे से ज़्यादा ऑनलाइन पत्रकार हैं.

पिछले 10 वर्षों की तरह चीन में सबसे ज़्यादा 24 पत्रकारों को जेल भेजा गया. इसके बाद रहे ईरान, क्यूबा, एरिट्रिया और बर्मा.

संयुक्त राष्ट्र में एक पत्रकार वार्ता में सीपीजे अधिकारियों ने बताया कि सरकार के दमन और अन्य शक्तियों द्वारा हमलों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय दवाब ही सबसे कारगर तरीका है.

ब्लॉग और सोशल नेटवर्किंग साइटों जैसे नए तरीकों ने दमन और प्रतिबंधों से निपटने में मदद की है.

पर सीपीजे अधिकारियों ने आगाह किया है कि चीन और टूनिशिया जैसे देश नई तकनीकों में हस्तक्षेप कर उसे पत्रकारों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर सकते हैं.

यहाँ ख़ास तौर पर ईरान का ज़िक्र किया गया कि कैसे तेहरान में बाग़ियों और पत्रकारों को पकड़ने के लिए ऑनलाइन सोशल नेटवर्कों का सहारा लिया जा रहा है.

पत्रकारों की हत्या पर आई रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षित ग्लोबल मीडिया सुनिश्चित करने के लिए नई रणनीतिक सोच की ज़रूरत है ताकि हत्यारों को पकड़ा जा सके, जेल भेजे जाने वाले पत्रकारों की संख्या कम हो सके और निर्वासन में रहने वाले पत्रकारों की मदद की जा सके.

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