बच्चों को मिला शोर मचाने का हक़

जर्मनी में बर्लिन की स्थानीय सरकार ने नया क़ानून पारित किया है जिसमें बच्चों को शोर मचाने का हक़ दिया गया है. ऐसा जर्मनी में पहली बार हुआ है.

बच्चे चाहे खेल-कूद रहें हो या अपनी अठखेलियों में मस्त हों...शोर शराबा होना तो लाज़मी है.

लेकिन जर्मनी में ध्वनि प्रदूषण को लेकर नियम बेहद सख़्त हैं. चर्च की घंटी या आपातकालीन साइरन जैसी आवाज़ों को छोड़ दें तो किसी को भी शोर मचाने की इजाज़त नहीं है.

पर अब बर्लिन शहर के बच्चों को इन सख़्त नियमों से बाहर रखने का फ़ैसला किया गया है.

शहर के क़ानून में बदलाव के बाद अब बच्चों का शोर मचाना ‘मूल रूप से और सामाजिक स्तर’ पर मान्य होगा.

जर्मनी के 16 फ़ेडरल प्रांतों में से बर्लिन ऐसा करने वाला पहला प्रांत है. जर्मनी में शोर शराबे को लेकर नियम बेहद कड़े हैं.

रात को और रविवार को दिन भर बर्लिन में आधिकारिक तौर पर ‘शांत समय’ होता है जिसका पालन बच्चों को भी करना होगा.

हमें भी हक़ है....

अब तक केवल बर्फ़ को हटाने वाले ट्रेक्टरों, चर्च की घंटी और आपातकालीन साइरन से होने वाले शोर जैसी चीज़ों को ही क़ानून के दायरे से बाहर रखा गया था.

अकेले बर्लिन में ही हर साल बच्चों के स्कूलों और खेल के मैदानों से आने वाले शोर के ख़िलाफ़ सैकड़ों शिकायतें दर्ज की जाती हैं.

दिन में बच्चों की देखभाल करने वाले कई केंद्रों को बंद करना पड़ा है क्योंकि स्थानीय लोगों ने शोर को लेकर कोर्ट में शिकायत कर दी थी.

बर्लिन में ध्वनि विभाग के एक्सल स्ट्रोबुक कहते हैं कि पहली बार क़ानूनी रूप से ये लिखा गया है कि हमें शोर मचाने के बच्चों के अधिकारों को ध्यान में रखना होगा और सभी पड़ोसियों को इस पर ग़ौर करना पड़ेगा.

जर्मनी में बच्चों के संरक्षण के लिए बनी संस्था ने एएफ़पी को बताया कि वो इस पहल का स्वागत करती है. संस्था ने कहा है कि बच्चों को खेलने और शोर-शराबा करने की अनुमति होनी चाहिए.

संबंधित समाचार