नीदरलैंड में सरकार गिरी

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री जोन पीटर
Image caption लेबर पार्टी सैनिकों की अफ़ग़ानिस्तान में तैनाती की समयसीमा बढ़ाने के ख़िलाफ़ है

अफ़ग़ानिस्तान में तैनात नीदरलैंड के सैनिकों की तैनीत की अवधि बढ़ाने के मुद्दे पर नीदरलैंड की गठबंधन सरकार गिर गई है.

गठबंधन सरकार के सदस्यों में नैटो के उस अनुरोध पर समहति नहीं बन पाई जिसके तहत उन्होंने कहा था कि नीदरलैंड अपनी सेनाएँ अफ़ग़ानिस्तान में पूर्व निर्धारित समयसीमा से एक साल अधिक, यानी 2011 तक तैनात रखे.

गठबंधन सरकार के सदस्यों में चली लंबी बातचीत के बाद क्रिस्चियन डैमोक्रेटिक पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री जान पीटर बाल्केनेन्दे ने घोषणा की कि लेबर पार्टी सरकार से बाहर जा रही है.

लेबर पार्टी वर्ष 2010 तक देश के सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान में तैनात रखने की पूर्व निर्धारित समयसीमा के आगे बढ़ाने के ख़िलाफ़ है.

एक बार बढ़ाई गई थी मयाद

अफ़ग़ानिस्तान के उरुज़गान प्रांत में वर्ष 2006 से नीदरलैंड के लगभग 2000 सैनिक तैनात हैं. इस दौरान इनमें से 21 मारे गए हैं.

इन सैनिकों को पहले वर्ष 2008 में देश वापस लौटना था लेकिन उनका अफ़गा़निस्तान में रुकने की मयाद बढ़ा दी गई क्योंकि किसी अन्य नैटो देश ने उनकी जगह अपने सैनिक भेजने की पेशकश ही नहीं की है.

लगभग सोलह घंटे चली गठबंधन की बैठक के बाद घोषणा की गई कि सरकार गिर गई है.

प्रधानमंत्री जान पीटर बाल्केनेन्दे ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई.

उनका कहना था, "जब कोई भरोसा न हो, तो साथ मिलकर काम करना मुश्किल होता है. ऐसा कोई रास्ता नहीं है कि ये कैबिनेट आगे चल सके."

वर्ष 2001 में बनाया गया नैटो का अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (आईसैफ़) यूरोप के बाहर नैटो का सबसे बड़ा सैन्य अभियान है.

जून 2009 तक 42 देशों से आईसैफ़ के 61 हज़ार सैनिक थे जिनमें अमरीका, कनाडा, यूरोपीय देशों, ऑस्ट्रेलिया, जॉर्डन और न्यूज़ीलैंड के सैनिक शामिल थे.

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