वीज़ा घोटाले का पर्दाफ़ाश

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बीबीसी के न्यूज़नाइट कार्यक्रम ने ब्रितानी स्टूडेंट वीज़ा के एक बड़े घोटाले का पर्दाफ़ाश किया है जिसमें भारतीय मूल के कुछ लोग शामिल पाए गए हैं.

ब्रिटेन में पिछले कुछ समय से स्टूडेंट वीज़ा के दुरुपयोग को लेकर मीडिया में ख़ासी चर्चा हो रही थी और अख़बारों में ऐसी ख़बरें आ रही थीं कि भारत सहित कई देशों से छात्र पढ़ाई के नाम पर वीज़ा लेकर ब्रिटेन में नौकरियाँ कर रहे हैं.

स्टूडेंट वीज़ा हासिल करने के लिए ब्रिटेन के दो हज़ार मान्यताप्राप्त संस्थानों में से किसी एक का 'वीज़ा लेटर' आवेदन के साथ देना होता है.

जिस घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है उसमें 150 से 200 पाउंड (10 से 16 हज़ार रुपए) में वीज़ा लेटर बेचे जा रहे थे और न्यूज़नाइट के रिपोर्टर ने भी ऐसे दो वीज़ा लेटर ख़रीदे.

ब्रिटेन में छात्र के रूप में आने के लिए प्वाइंट पर आधारित व्यवस्था है, वीज़ा लेटर और बैंक में अकाउंट में पैसे दिखाकर कोई भी व्यक्ति आसानी से वीज़ा हासिल कर सकता है, बैंक अकाउंट में पैसे दिखाने के लिए छात्र लोगों से उधार लेकर अपने खाते में डाल रहे थे जिसे वीज़ा मिलने के तुरंत बाद वापस कर दिया जाता है.

न्यूज़नाइट की टीम को पता चला था कि लंदन के बाहर हेज़ में स्थित एक मान्यताप्राप्त शिक्षण संस्था से जुड़े लोग वीज़ा लेटर बेच रहे हैं.

बीबीसी के रिपोर्टर को जिस संस्थान के पूर्व कर्मचारी ने वीज़ा लेटर बेचा था उसका नाम है-गेटवे टू यूके एजुकेशन और इसके मालिक रहे हैं भारतीय मूल के वकील दर्पण शाह.

दर्पण शाह का कहना है कि वे बहुत कम समय तक इस कंपनी के मालिक थे और उसके बाद उन्होंने इस कंपनी को बेच दिया था, उन्होंने अपने वकील के माध्यम से इन आरोपों को ग़लत बताया है.

दर्पण शाह के जिस पूर्व कर्मचारी ने बीबीसी के रिपोर्टर को वीज़ा लेटर भेजा था वह अब भारत में है और उसका कहना है कि उसने अपने मालिक के आदेशों का पालन किया था, वह सिर्फ़ अपनी नौकरी कर रहा था और इस घोटाले में फँसने को लेकर बहुत अफ़सोस है.

न्यूज़नाइट की टीम ने जब गेटवे टू यूके एजुकेशन के हेज़ स्थित कैम्पस में प्रिसिंपल को वीज़ा लेटर दिखाए तो उन्होंने पूरी तरह से अनभिज्ञता प्रकट की, अगले दिन संस्थान के प्रिंसिपल जर्मी कॉल्टन को एक बक्से में 160 फर्ज़ी वीज़ा मिले जिन्हें बड़ौदा की क्रिस इमीग्रेशन कंपनी ने भेजा था.

क्रिस इमीग्रेशन के मालिक भी दर्पण शाह ही हैं लेकिन उनका कहना है कि उस कंपनी के कामकाज पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है. दर्पण शाह का कहना है कि उनके कर्मचारियों ने हेराफेरी की है और वे अनजाने में इस चक्कर में फँस गए हैं.

इस महीने की शुरूआत में न्यूज़नाइट की खुफ़िया जाँच के दौरान ही ब्रितानी सरकार ने गेटवे टू यूके एजुकेशन की मान्यता रद्द कर दी है, दो अन्य कॉलेजों के भी लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं जिनका संबंध दर्पण शाह से था.

इस घोटाले के सामने आने के बाद ब्रितानी सरकार ने स्टूडेंट वीज़ा से जुड़े घपलों को रोकने के लिए कई क़दम उठाए हैं.

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