परमाणु हथियारों में होगी कटौती

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने देश के परमाणु हथियारों में महत्वपूर्ण कटौती की प्रक्रिया शुरु कर दी है.

उन्होंने रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स से भी मुलाकात की ताकि नई रणनीति पर चर्चा की जा सके.

ओबामा ने पिछले साल अप्रैल में कहा था कि वो ऐसी दुनिया की कल्पना करते हैं जहाँ परमाणु हथियारों की जगह नहीं है.

उन्होंने कहा था कि शीत युद्ध काल की सोच बदलनी होगी और इसमें अमरीका की बड़ी भूमिका होगी.

ओबामा का कहना था कि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए नई साझेदारियाँ बनानी होंगी.

कब हो इस्तेमाल?

माना जा रहा है कि नए परमाणु हथियार बनाने की पूर्व बुश प्रशासन की योजना को ओबामा लागू नहीं करेंगे.

लेकिन एक जटिल मुद्दा अब भी बना हुआ है और वो ये कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कब किया जा सकता है.

बहस दो खेमें को बीच में है- एक खेमा मानता है कि अमरीकी परमाणु हथियारों का मकसद केवल यह होना चाहिए कि दूसरे देश उसकी परमाणु क्षमता देखकर हमला न करें. वहीं दूसरा खेमा वो है जो पहले परमाणु हमला करने का विकल्प रखना चाहते हैं.

परमाणु सुरक्षा मामलों को लेकर अगले महीने एक वैश्विक सम्मेलन भी होने वाला है.

इस सम्मेलन से पहले ओबामा प्रशासन परमाणु नीति पर पुनर्विचार कर रहा है. ये नीति पहले दिसंबर में जारी होनी थी.

कहा जा रहा है कि इस नीति का पहला प्रस्ताव पत्र नकार दिया गया है क्योंकि ये अमरीकी की पुरानी नीति से कुछ ख़ास अलग नहीं था.

परमाणु नीति

ये पुनर्विचार ऐसे समय किया जा रहा है जब रूस और अमरीका अपने-अपने परमाणु जखीरे कम करने पर सहमत होते नज़र आ रहे हैं.

हालांकि अमरीका की मिसाइल सुरक्षात्मक प्रणाली को लेकर रूस में चिंता है.

सोमवार को रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा था कि 1991 की स्टार संधि की जगह नई नीति तैयार करने की प्रक्रिया काफ़ी आगे बढ़ गई है.

अमरीका और रूस के बीच ये संधि पिछले साल दिसंबर में ख़त्म हो गई थी.

मेदवेदेव ने कहा कि दोनों देश करीब-करीब सभी मुद्दों पर एकमत हैं लेकिन साथ ही माना ये आसान विषय नहीं है.

परमाणु अप्रसार संधि पर पुनर्विचार करने के लिए भी मई में सम्मेलन होगा. अमरीका और रूस के बीच बातचीत का असर इस पर पड़ेगा.