ईरान पर ब्राज़ील-अमरीका मतभेद बरकरार

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर प्रतिबंध लगाने की अमरीकी नीति का ब्राज़ील ने एक बार फिर विरोध किया है.

ब्राज़ील को मनाने के लिए अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ब्रासिलिया में थी लेकिन ब्राज़ील ने अमरीकी कोशिशों को सिरे से ठुकरा दिया है.

एक संयुक्त पत्रकार वार्ता में ब्राज़ील के विदेश मंत्री सेल्सो एमोरिम ने कहा कि उनका देश अमरीका के दवाब में नहीं आएगा क्योंकि उन्हें लगता है कि प्रतिबंध लगाने से पहले ईरान से वार्ता ज़रूरी है.

संवाददाताओं का कहना है कि ईरान नीति को लेकर समर्थन जुटाने की अमरीकी कोशिशों को इससे धक्का लगा है.

बातचीत से पहले ही ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने कह दिया था कि ईरान को हाशिए पर धकेलना ठीक नहीं होगा. वे मानते हैं कि बातचीत से ही बेहतर नतीजे निकल सकते हैं.

वहीं हिलेरी क्लिंटन का कहना है कि अमरीका ने कभी दरवाज़े बंद नहीं किए हैं लेकिन ऐसा लगता नहीं है कि ईरानी नेता बातचीत करना चाहते हैं.

मतभेद कायम

ब्राज़ील और अमरीका दोनों मानते हैं कि ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर काम नहीं करना चाहिए.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यहीं पर आकर दोनों देशों के रवैये में समानताएँ ख़त्म हो जाती हैं

दक्षिण अमरीका के सबसे बड़े देश ब्राज़ील की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान हिलेरी क्लिंटन इस बात पर अड़ी रहीं कि अगर ईरान पर और प्रतिबंध लगाए जाते हैं तभी वो बातचीत के लिए तैयार होगा.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ब्राज़ील के पास वीटो का अधिकार नहीं है लेकिन वो परिषद का वर्तमान सदस्य है जो मतदान कर सकता है.

इसलिए अमरीकी प्रशासन ब्राज़ील का समर्थन हासिल करना चाहता है.

लेकिन ब्राज़ील के राष्ट्रपति ईरान को अलग-थलग करने के प्रति आगाह करते रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीकी दवाब के बावजूद ब्राज़ील ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के संवेदनशील मुद्दे पर वो अपनी स्वतंत्र नीति को ही मानेगा.

ब्राज़ीलियाई विदेश मंत्री ने कहा कि हर देश को इस मुद्दे पर अपनी सोच बनानी होगी.

उनका कहना था, ब्राज़ील भी चाहता है कि एक ऐसी दुनिया हो जहाँ परमाणु हथियारों का प्रसार न हो लेकिन सवाल यही है कि इस मकसद को हासिल कैसे किया जाए.

विश्व में ब्राज़ील के बढ़ते रुतबे को अमरीका ने स्वीकार तो किया है लेकिन ये भी कहा है कि प्रभुत्व के साथ-साथ ज़िम्मेदारियाँ भी आती हैं.

संवाददाता के मुताबिक हिलेरी क्लिंटन की ब्राज़ील यात्रा के दौरान दोनों देशों ने ईरान पर अपने मतभेद सौहार्दपूर्ण तरीके से सामने रखे हैं लेकिन कोई भी देश अपना रुख़ बदलने को तैयार नहीं है.

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