मध्य पूर्व वार्ता पर अरब लीग की मंज़ूरी

अरब लीग की बैठक
Image caption फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने अरब लीग की मंज़ूरी का स्वागत किया है.

अरब देशों के विदेश मंत्रियों ने इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच शांति वार्ता फिर से शुरू करने के अमरीकी प्रस्तावों को मंज़ूर कर लिया है जिसका मतलब है कि इस शांति प्रक्रिया के तहत ताज़ा बातचीत जल्दी ही शुरू हो सकती है.

अमरीका सरकार ने पेशकश की है कि ग़ज़ा पर लगभग एक वर्ष पहले इसराइली हमले के बाद से दोनों पक्षों में जो गतिरोध पैदा हो गया था, उसे तोड़ने के लिए अनौपचारिक संबंध शुरू किए जाएँ.

इसराइल सरकार ने इस घटनाक्रम का स्वागत किया है. अमरीका इससे पहले इसराइल और फ़लस्तीनियों से अलग-अलग बातचीत करता रहा है.

इसराइल सरकार के प्रवक्ता मार्क रीगेव ने कहा, "प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतान्याहू बातचीत फिर से शुरू करने की काफ़ी समय से माँग करते रहे हैं और अब उम्मीद की जा सकती है कि बातचीत आगे बढ़ सकेगी."

अरब देशों के विदेश मंत्रियों ने मिस्र की राजधानी काहिरा में एक बैठक के बाद कहा कि इस तरह की अनौपचारिक बातचीत की समय सीमा चार महीना होनी चाहिए.

अरब लीग के महासचिव अम्र मूसा का कहना था, "अरब शांति समिति हालाँकि इस बारे में संतुष्ट नहीं है कि इसराइल शांति के बारे में गंभीर है लेकिन फिर भी अनौपचारिक बातचीत को एक मौक़ा दिया ही जाना चाहिए. इससे अमरीकी भूमिका का रास्ता भी साफ़ हो सकता है लेकिन अनौपचारिक बातचीत अनिश्चित काल तक नहीं चल सकतीं और चार महीने के भीतर पूरी हो जानी चाहिए."

चार महीने बाद

अरब लीग में सीरिया के दूत यूसुफ़ अहमद का कहना था, "विदेश मंत्रियों की कमेटी को अनौपचारिक बातचीत पर आपत्ति नहीं है लेकिन अगर अब से चार महीने के भीतर कुछ भी हासिल नहीं हो पाता है तो यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र परिषद में पेश किया जाएगा."

फ़लस्तीनी प्रशासन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा है कि वो भी अरब देशों के विदेश मंत्रियों के इस निर्णय और अनौपचारिक बातचीत के सिद्धांत को स्वीकार करते हैं.

फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन अगर इन प्रस्तावों को स्वीकर कर लेगा तो यह अनौपचारिक बातचीत शुरू हो सकेगी. एक फ़लस्तीनी प्रवक्ता का कहना था कि इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच सीधी बातचीत का विकल्प अभी संभव नहीं है.

फ़लस्तीनियों की माँग है कि इसराइल फ़लस्तीनी क्षेत्रों - पूर्वी येरूशलम और पश्चिमी तट में यहूदी बस्तियों को बढ़ाना बंद करे. जवाब में इसराइल ने कुछ दिन पहले यहूदी बस्तियों के विस्तार पर अस्थाई रोक लगाने की घोषणा की थी.

मुद्दा ये भी है कि पूर्वी येरूशलम पर किसका नियंत्रण होगा. इसराइल उसे वृहत येरूशलम का हिस्सा कहता है जबकि फ़लस्तीनियों का कहना है कि इसराइल ने पूर्वी येरूशलम पर 1967 के युद्ध में क़ब्ज़ा किया था और वो विवादित क्षेत्र है जिसे फ़लस्तीनी अपने भावी राष्ट्र की राजधानी बनाना चाहते हैं.

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