इंटरनेट स्वतंत्रता बढ़ाने पर अमरीकी आदेश

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अमरीका ने ईरान, सूडान और क्यूबा के ख़िलाफ़ व्यापार प्रतिबंधों में ढील देने का फ़ैसला किया है ताकि इन देशों में इंटरनेट के इस्तेमाल की स्वतंत्रता को बढ़ावा दिया जा सके.

अमरीका मानता है कि इन देशों में सरकारें दमनकारी नीतियाँ अपनाती हैं.

अमरीका इन देशों को वेब, ईमेल, इनस्टेंट मेसेजिंग और सोशल नेटवर्किंग साईट्स के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाएगा जिससे अमरीका की कंपनियाँ इनका निर्यात इन देशों को कर सकेंगी.

इन कंपनियों ने इन देशों में अब तक ये सेवाएँ इसलिए उपलब्ध नहीं कराई थीं क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं ये प्रतिबंधों का उल्लंघन न माना जाए.

अमरीकी वित्त मंत्रालय के अनुसार वेब ब्राउसिंग, ब्लॉगिंग, ईमेल, इनस्टेंट मेसेजिंग, चैट, सोशल नेटवर्किंग, फ़ोटो और फ़िल्म शेयरिंग की सेवाओं के निर्यात की इजाज़त होगी.

अमरीका के वित्त मंत्रालय का कहना है कि वह क्यूबा, सूडान और ईरान के नागरिकों के लिए एक दूसरे से और बाहरी दुनिया से संपर्क बनाना आसान करना चाहता है.

मंत्रालय का ये भी कहना है कि इन तकनीक से लोग अपने मौलिक अधिकारों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर पाएँगे.

इंटरनेट के इस्तेमाल में स्वतंत्रता अमरीकी विदेश नीति का मूल अंग बनता जा रहा है. फ़रवरी में विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा था कि जो देश इंटरनेट के इस्तेमाल पर रोक लगा रहे हैं वो मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा का उल्लंघन कर रहे हैं...ईरान ने पिछले महीने प्रदर्शनों से पहले जीमेल के इस्तेमाल पर सख़्ती बढ़ा दी थी.

अमरीका के उप वित्त मंत्री नील वूलिन ने कहा, "जैसा कि ईरान में हाल की घटनाओं ने दिखाया है, निजी तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले संचार माध्यम जैसे ईमेल, इनस्टेंट मेसेजिंग, सोशल नेवर्किंग बहुत ही शक्तिशाली सेवाएँ हैं."

वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता किम घट्टास का कहना है कि इंटरनेट के इस्तेमाल में स्वतंत्रता अमरीकी विदेश नीति का मूल अंग बनता जा रहा है.

ईरान में चुनावों के बाद विपक्ष के समर्थकों ने सोशन नेटवर्किंग साईट्स का इस्तेमाल प्रदर्शनों को आयोजित करने में किया था.

ग़ौरतलब है कि पिछले साल माइक्रोसॉफ़्ट ने पिछले साल पाँच देशों - ईरान, क्यूबा, सूडान समेत पाँच देशों के इंटरनेट यूज़र्स पर इनस्टेंट मेसेजिंग की सेवाएँ इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी थी.

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