बौद्ध धर्म को ख़त्म करने की कोशिश: दलाई लामा

दलाई लामा - फ़ाइल फ़ोटो

तिब्बतियों के निर्वासित धर्मगुरु दलाई लामा ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह तिब्बत में बौद्ध धर्म को ख़त्म करने की कोशिश कर रहा है.

भारत में निर्वासत दलाई लामा ने कहा है कि चीन ने भिक्षुओं और भिक्षुणियों को जेल जैसी परिस्थितयों का सामना करना पड़ रहा है.

वर्ष 1959 में तिब्बतियों के आंदोलन और बीजिंग ओलंपिक से पहले तिब्बत में हुए दंगों के दो साल पूरे होने के मौक़े पर दलाई लामा की ओर से ये कड़ा बयान आया है.

दलाई लामा का कहना था, "चीन की सरकार कई तरह के राजनीतिक अभियान चला रही है. इसमें देशभक्ति के मुद्दे पर तिब्बतियों को दोबारा शिक्षित करने का अभियान शामिल है. वे भिक्षुओं और भिक्षुणियों को जेल जैसी परिस्थितियों का सामना करने पर मजबूर कर रहे हैं. इससे उन्हें शांति से अध्ययन और प्रशिक्षण करने के अवसरों से वंचित किया जा रहा है. ऐसी स्थिति में मठ अजायबघर बनकर रह गए हैं और मकसद बौद्ध धर्म को जानबूझकर ख़त्म करने का प्रयास है."

उन्होंने निराशा भरे अंदाज़ में कहा, "तीस साल से अधिक समय से मैंने चीन की सरकार से बातचीत करने की कोशिश की है ताकि कोई बीच का रास्ता निकालकर तिब्बत के मुद्दे को सुलझाया जा सके. हमें कोई ठोस नतीजा नहीं मिला है. आज के चीनी नेतृत्व के बर्ताव से लगता है कि जल्द कोई नतीजा मिलने की संभावन कम है. लेकिन हम इस बात पर कायम हैं कि बातचीत चलती रहे."

दलाई लामा ने कहा कि चाहे चीन की सरकार इसे माने या न माने, तिब्बत में गंभीर समस्या है. उनका कहना था कि पूरा विश्व जानता है कि तिब्बत में बड़ी संख्या में फ़ौज तैनात है और तिब्बत में आने-जाने पर पर कई तरह की रोक है और यह दोनों में से किसी भी पक्ष के लिए अच्छा नहीं है.

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