आख़िर क्यों कम नहीं हो रहीं झुग्गियाँ

धारावी
Image caption झुग्गियों में रहनेवालों की संख्या लगातार बढ़ रही है

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक दुनियाभर में शहरों के विस्तार के मुक़ाबले झुग्गियों को हटाने की कोशिश पीछे छूट रही है.

संयुक्त राष्ट्र की रिहाइश से संबंधित कार्यक्रम की रिपोर्ट में ये सामने आया है कि साल 2020 तक दुनियाभर में झुग्गियों में रहनेवाले लोगों की संख्या 90 करोड़ पहुंच जाएगी.

शहरों का विस्तार काफी तेज़ी से हो रहा है लेकिन इसके साथ झोपड़-पट्टियों को हटाने की प्रक्रिया पीछे रह गई है.

हालांकि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट इस चलन के एक और पहलू की ओर भी इशारा करती है.

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 वर्ष में 22 करोड़ से ज़्यादा लोगों को झुग्गियों से निकालकर जीवन बसर करने के लिए बेहतर घर दिए जा सके हैं.

इसका श्रेय संयुक्त राष्ट्र भारत और चीन को देता है जिन्होंने शहरों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भारी निवेश किया है.

लेकिन दुनिया के बाकी हिस्सों में झुग्गियों में रहनेवालों की बढ़ती संख्या ने इस उपलब्धि की चमक फीकी कर दी है.

संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी ऐना तिबाइजुका बताती हैं, “हर साल एक करोड़ 40 लाख लोग झुग्गियों में रहने लगते हैं. ज़ाहिर है अगर सुधार हो भी रहा है, तो दिखाई नहीं देता.”

अफ्रीका महाद्वीप में दुनिया की सबसे ज़्यादा आबादी झुग्गियों में रह रही है.

दक्षिण और पूर्वी एशिया में भी झोपड़-पट्टी में रहने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

इसके मुख्य कारण मौजूदा झुग्गियों में आबादी बढ़ना, गांव-देहात से लोगों का शहरों की ओर पलायन और शहरों का आसपास के इलाकों में विस्तार कर जाना है.

झुग्गियों को हटाना संयुक्त राष्ट्र के सहस्राब्दी के विकास के लक्ष्यों में से एक है.

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