मुंबई हमले पर हेडली का बयान

ताज महल होटल, मुंबई
Image caption हेडली ने ही मुंबई के ताज महल होटल समेत कई जगहों के बारे में जानकारी जुटाई

अमरीकी अदालत में अपराध कबूल करते हुए डेविड हेडली ने मुंबई हमले का पूरा ब्यौरा दिया है.

हेडली ने बताया कि वर्ष 2005 में लश्करे तैबा के तीन सदस्यों के निर्देश के अनुसार उन्होंने भारत जाकर अपनी योजनाओं के लिए जानकारी जुटानी शुरू की.

उस समय उन्होंने अपना नाम दाऊद गिलानी ने बदल कर डेविड कोलमैन हेडली रख लिया.

इस नए नाम से उनके पाकिस्तानी मूल के बारे में ज़्यादा पता नहीं चलता था. ये नाम किसी अमरीकी का लगता था जो न मुस्लिम था और न ही पाकिस्तानी.

वर्ष 2006 की शुरुआत में उन्होंने लश्कर के दो सदस्यों के साथ भारत में अपनी गतिविधियों को छुपाने के लिए मुंबई में एक आप्रवासन कार्यालय खोलने की योजना बनाई.

भारत के दौरे

हेडली ने बताया कि उन्होंने सितंबर, 2006, फ़रवरी और सितंबर 2007 और अप्रैल और जुलाई 2008 में भारत के पांच दौरे किए.

Image caption 2008 मुंबई में हुए आतंकी हमलों में 164 लोगों की मौत हुई थी.

हर दौरे में उन्होंने अलग-अलग जगहों का वीडियो बनाया.

ये वो जगहें थीं जो आगे चलकर चरमपंथी हमलों का निशाना बनाई जा सकती थीं.

इनमें नवंबर, 2008 के मुंबई हमलों के इलाक़े भी शामिल थे.

हेडली के मुताबिक हर दौरे से पहले उन्हें इन इलाक़ों के बारे में निर्देश मिले थे और हर दौरे के बाद वो पाकिस्तान जाकर भारत में रिकॉर्ड किए वीडियो सौंप देते थे.

मुंबई हमले की तैयारी

अप्रैल, 2008 में वो मुंबई हमले के लक्ष्यों पर जानकारी जुटाने के लिए भारत आए.

Image caption 2009 में हेडली ने कई शहरों के चाबाद हाउस के बारे में जानकारी जुटाने के लिए दौरा किया.

इससे पहले वो पाकिस्तान में लश्कर के सदस्यों से मिले और चरमपंथी हमले के लिए समुद्र के ज़रिए मुंबई आने की योजना बनाई.

इस योजना के मद्देनज़र वो अपने साथ ग्लोबल पोजीशनिंग डिवाइस (जीपीएस) लेकर मुंबई आए.

मुंबई में उन्होंने नौका पर बैठकर इस यंत्र के ज़रिए मुंबई के तट और कई स्थानों की भौगोलिक स्थिति के बारे में जानकारी जुटाई.

मुंबई हमला

ग़ौरतलब है कि 26 नवंबर, 2008 को लश्कर के 10 चरमपंथियों ने मुंबई में कई जगहों पर हमला किया जिनमें अनेक लोगों की जान चली गई और सैकड़ों घायल हुए.

इनमें ताज महल होटल, ओबरॉय होटल, लियोपॉल्ड कैफे और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस शामिल थे.

इन सब निशानों के बारे में हेडली ने ही जानकारी जुटाई थी.

उन्होंने बताया है कि मार्च, 2009 में उन्होंने भारत का छठा दौरा किया.

इस बार उन्होंने दिल्ली के नेशनल डिफेन्स कॉलेज और कई शहरों के यहूदी धार्मिक स्थलों के बारे में जानकारी जुटाई थी.

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