हिलेरी क्लिंटन रूस के दौरे पर

रूसी मिसाइल
Image caption अमरीका के पास दो हज़ार और रूस के पास तीन हज़ार परमाणु मिसाइल हैं

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन रूस का दौरा कर रही हैं जहाँ वे दोनों देशों के बीच नई परमाणु संधि को अंतिम रूप देने का प्रयास करेंगी.

इस संधि को लेकर पिछले लगभग एक साल से बातचीत चल रही है और अब कोशिश है कि इस महीने के अंत तक उसे कोई अंतिम रूप से दे दिया जाए. इसका मकसद

दोनों देशों के परमाणु हथियारों के भंडार में भारी कटौती करना है.

अमरीका और रूस ने हथियारों की कटौती के लिए 1991 में एक समझौता किया था – स्टार्ट ट्रीटी – स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी – जो पिछले साल दिसंबर में ख़त्म हो गई.

अब नया समझौता किया जाना है जिसपर लगभग साल भर से बात चल रही है.

अमरीका के पास दो हज़ार से अधिक परमाणु हथियार हैं, रूस के पास लगभग तीन हज़ार.

हिलेरी क्लिंटन रूस के अपने दो दिवसीय दौरे में रूस के साथ मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया की बहाली के बारे में भी चर्चा करेंगी.

प्रगति

आधिकारिक रूप से अमरीका समझौते के लिए वैसी जल्दीबाज़ी नहीं दिखा रहा मगर समझा जाता है कि राष्ट्रपति ओबामा चाहते हैं कि संधि पर अगले महीने परमाणु अप्रसार के बारे में होनेवाले एक बड़े सम्मेलन में दस्तख़त हो जाए.

इस संबंध में अमरीकी राष्ट्रपति और रूसी राष्ट्रपति दमित्री मेदवदेव के बीच पिछले सप्ताह फ़ोन पर बात भी हुई थी.

अब इसी उद्देश्य से हिलेरी क्लिंटन रूस का दौरा कर रही हैं जहाँ वे कोशिश करेंगी कि रूसी नेता जल्दी-जल्दी बात आगे बढ़ाएँ.

इसी बीच उनके एक सहयोगी विदेश उपमंत्री विलियम बर्न्स ने कहा है कि समझौते पर सहमति की दिशा में अच्छी प्रगति हो रही है.

उन्होंने वाशिंगटन में पत्रकारों से कहा,"मैं ये तो भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि समझौता कब पूरा होगा, मगर हम उसके निकट पहुँच रहे हैं".

रूसी विदेश मंत्रि सर्गेइ लवरोफ़ ने कहा है कि संधि सचमुच अंतिम चरण में है और अब केवल कुछ तकनीकी मसलों पर स्पष्टीकरण लिया जाना है.

मगर इससे पहले रूस ने ख़ुलकर ये दर्शाया है कि वह संधि को लटकाए रखना चाहता है.

विशेष रूप से पूर्वी यूरोप में मिसाइल रक्षा कवच बनाने का अमरीका का फ़ैसला रूस को रास नहीं आया है और इसे लेकर दोनों की नहीं बन रही.

इसके अतिरिक्त ईरान पर प्रतिबंध लगाने के मामले पर भी अमरीका को ये भरोसा नहीं है कि रूस उसके साथ खड़ा रहेगा.

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