राष्ट्रमंडल खेलों से पहले छवि सुधारें

अभद्रता
Image caption खुले मे पेशाब करना या थूकना एक आम दृश्य हो चुका है

राष्ट्रमंडल खेलों से पहले दिल्लीवासियों की छवि में सुधार के लिए दिल्ली सरकार ने कुछ निर्देश तैयार किए हैं.

इन निर्देशों के मुताबिक़ सार्वजनिक स्थलों पर पेशाब करने या थूकने की मनाही की गई है.

उल्लेखनीय है कि भारत में खुले में पेशाब करना या थूकना एक आम नज़ारा है, जो कहीं भी देखा जा सकता है.

ये निर्देश इसलिए तैयार किए गए हैं, जिससे राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान आने वाले सैलानियों को ये बताया जा सके कि मेज़बान दिल्ली के निवासी सभ्य और सुसंस्कृत हैं.

अधिकारियों का कहना है, कि लोगों को सभ्य व्यवहार सिखाने के लिए मीडिया और विज्ञापनों के ज़रिए बहुत बड़े प्रचार अभियान की योजना बनाई गई है.

तीन अक्तूबर से लेकर 14 अक्तूबर तक होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के लिए हज़ारों सैलानियों के आने की संभावना है.

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के हवाले से एक भारतीय अख़बार ने लिखा है, "हम दिल्ली की सार्वजनिक संस्कृति को बदलना चाहते हैं, जिससे लोग एक दूसरे के साथ और अपने मेहमानों के साथ विनम्रता से पेश आएं. हम ये चाहते हैं कि जब सैलानी यहां से वापस जाएं तो ये धारणा लेकर जाएं कि दिल्ली सभ्य लोगों का शहर है."

दिल्ली पर्यटन विभाग की प्रमुख रीना रे के हवाले से अख़बार लिखता है, "हम उन्हें ये बताना चाहते हैं कि वे सार्वजनिक स्थलों पर न तो पेशाब करें, और न ही थूकें. अपने घरों को, दूकानों को साफ़-सुथरा रखें और सार्वजनिक यातायात को सुरक्षित बनाएं."

कुछ महीने पहले गृहमंत्री पी चिदंबरम ने भारतवासियों से अपने आचरण के तौर तरीक़ों में सुधार करने की अपील करते हुए कहा था कि वे सार्वजनिक स्थलों पर पेशाब करना या थूकना बंद करें.

सार्वजनिक आचरण में सुधार के लिए इससे पहले भी कई राज्यों ने क़दम उठाए हैं.

तीन साल पहले राजस्थान सरकार ने सार्वजनिक स्थलों पर पेशाब करने या थूकने या दीवारों पर लिखने पर प्रतिबंध लगा दिया था.

कोलकाता ने भी खुले में पेशाब करने वालों को दंडित किए जाने की घोषणाएं की थी.

लोगों को खुले में इस तरह की हरकतें करने से रोकने के लिए कई बार तो देवी-देवताओं के चित्र भी लगाए गए हैं.

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