वार्ता शुरू कराने के प्रयास तेज़

Image caption संयुक्तराष्ट्र महासचिव ने पूर्वी येरुशलम में नए मकान बनाने की इसराइल की योजना की कड़ी निंदा की है

संयुक्तराष्ट्र महासचिव बान की मून ने मध्यपूर्व शांति प्रकिया को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशों के तहत फ़लस्तीनी नेताओं से मुलाक़ात की है. उनका इसराइली नेताओं से मिलने का भी कार्यक्रम है.

मध्यपूर्व में मून का पहला पड़ाव फ़लस्तीनी पश्चिमी तट का शहर रामल्ला था, जहाँ उनकी फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री सलाम फ़य्याद के साथ बातचीत हुई.

उल्लेखनीय है कि पूर्वी येरुशलम में 1600 नए मकान बनाने की इसराइल की विवादास्पद घोषणा के बाद मध्यपूर्व शांति प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने के प्रयासों को गहरा धक्का लगा है.

फ़लस्तीनी नेतृत्व ने मून को स्पष्ट रूप से बता दिया कि पूर्वी येरुशलम में यहूदी बस्तियों के विस्तार की योजना इसराइल-फ़लस्तीनी वार्ताओं की शुरुआत की राह में बहुत बड़ी बाधा है.

संयुक्तराष्ट्र महासचिव मध्यपूर्व की अपनी इस यात्रा के दौरान इसराइली राष्ट्रपति शिमोन पेरेज़ से भी मिलेंगे.

कड़ी निंदा

शुक्रवार को ही मध्यपूर्व पर गठित चारपक्षीय समूह या क़्वार्टेट ने पूर्वी येरुशलम में नए मकानों के निर्माण की इसराइल की घोषणा की कड़ी निंदा की थी. इस समूह में संयुक्तराष्ट्र के अलावा अमरीका, रूस और यूरोपीय संघ शामिल हैं.

रामल्ला पहुँचे बान की मून ने एक बार फिर दो टूक शब्दों में इसराइल की योजना की आलोचना की, "दुनिया पूर्वी येरुशलम में इसराइल की विस्तार नीति की निंदा कर चुकी है. इसमें कोई संदेह नहीं कि इसराइली क़ब्ज़े वाले इलाक़ों में बस्तियों के विस्तार का कार्यक्रम अवैध है, जिसे हर हाल में रोका जाना चाहिए."

मून ने दोनों पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील भी की.संयुक्तराष्ट्र महासचिव ने दो वर्षों के बीच मध्यपूर्व में शांति समझौता कराने का लक्ष्य घोषित किया है.

तेज़ हुए कूटनीति प्रयासों के तहत रविवार को अमरीका के विशेष प्रतिनिधि जॉर्ज मिचेल भी मध्यपूर्व पहुँच रहे हैं.

उधर इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भी अमरीका यात्रा की घोषणा की है जहाँ वे विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन के साथ बातचीत करेंगे. उनकी अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाक़ात की भी संभावना है.

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