अमरीका-इसराइल संबंधों में 'प्रगति नहीं'

नेतन्याहू
Image caption इसराइली प्रधानमंत्री ने अपने अमरीका दौरे को बढ़ा दिया है

इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दो दिन की अमरीका यात्रा के बाद वापस लौट गए हैं. लेकिन दोनों देशों के बीच तनातनी समाप्त होने के कोई संकेत नहीं हैं.

इसके पहले अमरीका ने ये स्वीकार किया था कि बातचीत के बावजूद पूर्वी यरुशलम में इसराइल की बस्तियाँ बनाने की योजना पर मतभेद बरकरार है.

इसके पहले इसराइली प्रधानमंत्री ने मध्य पूर्व के लिए अमरीका के विशेष दूत जॉर्ज मिचेल से मुलाक़ात की थी.

व्हाइट हाउस प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स का कहना था,''राष्ट्रपति ओबामा ने इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से क़दम उठाने के लिए कहा है ताकि दोनों पक्षों के बीच विश्वास बढ़े और मध्यपूर्व शांति प्रक्रिया में प्रगति हो सके.''

उनका कहना था कि दोनों ही तरफ़ से कुछ मामलों में रज़ामंदी है लेकिन मुद्दों पर मतभेद भी हैं.

तनातनी

इसके पहले इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा से मुलाक़ात की थी.

नेतन्याहू और ओबामा के बीच पहली मुलाक़ात लगभग 90 मिनट चली.

इस मुलाक़ात के बाद राष्ट्रपति ओबामा घर चले गए लेकिन इसराइली प्रधानमंत्री ने उनसे एक बार फिर मिलने की इच्छा जताई.

इसके बाद दोनों नेताओं ने लगभग 30 मिनट फिर साथ बिताए.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमूमन इसराइली नेताओं का व्हाइट हाउस में भारी स्वागत किया जाता है लेकिन इस बार माहौल कुछ अलग सा है.

इसके पहलेअमरीका ने पूर्वी यरूशलम में नई बस्तियाँ बनाने के इसराइल के फ़ैसले की कड़ी आलोचना की थी.

ग़ौरतलब है कि 1967 में पश्चिमी तट और पूर्वी यरूशलम पर नियंत्रण के बाद इसराइल 100 से ज़्यादा बस्तियों का निर्माण कर चुका है जिनमें क़रीब पाँच लाख यहूदी रहते हैं.

अंतरराष्ट्रीय क़ानून के मुताबिक़ ये निर्माण अवैध हैं, लेकिन इसराइल इसे सही मानता है.

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