मॉस्को मेट्रो 'दुनिया की व्यस्ततम मेट्रो'

मॉस्को मेट्रो
Image caption मॉस्को मेट्रो से हर दिन 55 लाख लोग सफ़र करते हैं

मॉस्को मेट्रो में बम हमले का मतलब है इस जीवंत शहर के दिल पर हमला करना क्योंकि मेट्रो से सफ़र काफ़ी सारे लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा है.

ये दुनिया के सबसे से ज़्यादा प्रयोग किए जाने वाले भूमिगत मेट्रो रेल सेवा में से एक है.

इससे प्रत्येक दिन लगभग 55 लाख लोग सफ़र करते हैं.

यह हमला मेट्रो के सबसे ज़्यादा व्यस्त समय में किया गया है जब लोगों को अपने दफ़्तरों को पहुंचने की जल्दी होती है.

रोज़ाने की ट्रैफ़िक से बचने के लिए अब लोग ज़्यादा लोग भूमिगत मेट्रो सेवा का प्रयोग करना पसंद कर रहें है जहां काफ़ी सारी ट्रेनें हैं और समय की भी पाबंदी बरक़रार रखी जाती है.

इस बम धमाके के बाद शहर की कई सड़कों पर ट्रैफ़िक बिलकुल रुक सा गया है. आपातकाल के समय प्रयोग की जाने वाली गाड़ियां पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने के काम में जुटी हैं जबकि आसमान में हेलिकॉप्टर मंडरा रहे हैं.

ऐतिहासिक मेट्रो

Image caption मॉस्कों में निजी मोटर गाड़ियों का चलन काफ़ी बढ़ा है

मेट्रो की योजना सोवियत संघ के ज़माने में तैयार की गई थी.

हालांकि रूस में प्राइवेट मोटर कार रखने में काफ़ी बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन फिर भी मेट्रो अपने कम किराए और व्यापक नेटवर्क के लिए साल भर व्यस्त रहती है.

मेट्रो रूसी राजधानी के ज़्यादातर हिस्से में पहुंचती है और कुछ स्टेशनों पर प्रदर्शित समाजवादी कला के लिए यह प्रसिद्ध है.

इसकी शुरूआत 1935 में हुई थी और उसके कुछ वर्ष बाद ही दूसरे विश्व-युद्ध के दौरान जर्मनी के बम हमलों से बचने के लिए इसके स्टेशनों का प्रयोग किया गया था क्योंकि यह दुनिया के कुछ सबसे गहरे स्थानों में से एक था.

बहुत से रूसी संयुक्त सोवियत संघ की समाप्ति और जातीय संघर्ष के फूट पड़ने को आतंकवाद से जोड़ते हैं.

चेचन्या में यह झड़प सब से ज़्याद ख़ूनी नज़र आती है.

बहरहाल पहली बार मेट्रो में चरमपंथी हमले ब्रेज़नेव के ज़माने में आठ जनवरी 1977 को हुए थे जब एक अमरीक पृथकतावादी ने एक डब्बे में बम लगा दिया था जिसमें सात लोग मारे गए थे और 37 अन्य घायल हुए थे.

लेकिन सोमवार को हुए ख़तरनाक बम विस्फोट से पहले छह साल के अंदर मेट्रो में कोई और बड़ा हमला नज़र नहीं आता है.

  • जून 1996 में सेरपुख़ोव्सकिया लाइन में हुए बम विस्फोट में चार लोग मारे गए थे जबकि 12 घायल हो गए थे.
  • जनवरी 1998 के बम विस्फोट में तीन लोग घायल हो गए थे.
  • अगस्त 2000 में टेवर्सकिया स्टेशन को जाने वाले रास्ते में हुए विस्फोट में 13 लोग मारे गए थे जबकि 118 लोग घायल हुए थे.
  • फ़रवरी 2001 में बेलोरेस्किया स्टेशन पर हुए हमले में 20 लोग घायल हुए थे.

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