प्रमुख ट्रेन धमाके

ट्रेन धमाका ( फाइल फोटो)
Image caption मेट्रो ट्रेनों को चरमपंथी लगातार निशाना बनाते रहे हैं.

मॉस्को की मेट्रो ट्रेनों में हुए धमाकों में 25 लोग मारे गए हैं और मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है.

वैसे ट्रेनों में हमले करना अब नई बात नहीं रही है और चरमपंथी इस तरह के धमाके पहले भी करते रहे हैं. दुनिया भर में ऐसे हमले हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की मौते हुई हैं.

ट्रेनों या परिवहन के साधनों को निशाना बनाना सबसे आसान माना जाता है क्योंकि यात्रा में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं. इसका प्रभाव अधिक होता है और मरने वालों में मध्य वर्ग के लोगों की संख्या अधिक हो सकती है.

ऐसे ही कुछ घटनाओं की जानकारी

मैड्रिड- 11 मार्च 2004- स्पेन की राजधानी मैड्रिड की मेट्रो ट्रेनों में हुए धमाके में 191 लोग मारे गए थे और 1800 घायल हुए थे. इन धमाकों के बारे में कहा जा सकता है कि संभवत पहली बार चरमपंथियों ने ट्रेनों को निशाना बनाया था. इस मामले में मोरक्को के चरमपंथियों को गिरफ्तार किया गया था.

लंदन- 07 जुलाई 2005- लंदन की मेट्रो ट्रेनों को भी सुबह के समय निशाना बनाया गया. इस घटना में चार ट्रेनों में और दो बसों में धमाके हुए. पूरी अफ़रा तफ़री मची और मरने वालों की संख्या थी 52. घायलों की संख्या सौ के क़रीब. इस मामले में भी गिरफ्तारियां हुई थीं और इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई.

मुंबई-26 जुलाई 2006- मुंबई की जान माने जाने वाली लोकल ट्रेनों में एक साथ सिलसिलेवाला सात धमाके हुए. शाम के समय हुए इन धमाकों में कार्यालय से वापस जाने वाले लोगों को निशाना बनाया गया. बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और मरने वालों की संख्या थी 187. मुंबई में अभी भी इस धमाके को लोग भूले नहीं हैं.

कोलंबो- 03 फरवरी 2008- कोलंबो के मुख्य रेलवे स्टेशन पर आत्मघाती हमले में ट्रेनों और यात्रियों को निशाना बनाया गया. मरने वालों की संख्या 11 और घायल हुए सौ से अधिक लोग. हमलों के लिए चरमपंथी संगठन एलटीटीई को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.

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