'ज़रदारी के ख़िलाफ़ नहीं खुल सकता मुक़दमा'

समाचार एजेंसियों के अनुसार स्विट्ज़रलैंड के सरकारी वकील का कहना है कि स्विस सरकार पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ दोबारा मुक़दमे नहीं खोल सकती है, क्योंकि राष्ट्रपति होने के नाते ज़रदारी को संवैधानिक छूट हासिल है.

इससे पहले पाकिस्तान में भ्रष्ट्राचार निरोधक एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसने राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ मुक़दमे दोबारा खोलने की कार्रवाई शुरु कर दी है और इस सिलसिले में स्विट्ज़रलैंड की सरकार को पत्र लिखा गया है.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार जेनेवा में स्विट्ज़रलैंड के सरकारी वकील डेनियल ज़ेपेली ने कहा है कि स्विस अधिकारी की ओर से राष्ट्रपति ज़रदारी के ख़िलाफ़ दोबारा मुक़दमे खोलने के लिए ज़रूरी है कि पहले पाकिस्तान की सरकार राष्ट्रपति को मिली संवैधानिक छूट को समाप्त करे. पाकिस्तान के संविधान में मिली छूट के आधार पर राष्ट्रपति पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है.

रॉयटर्स के अनुसार सरकारी वकील ने ये भी कहा है कि उन्हें अब तक तक पाकिस्तान की सरकार की ओर से आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ दोबारा केस खोलने के सिलसिले में कोई पत्र नहीं मिला है.

कार्रवाई संभव नहीं

एपी ने ख़बर दी है कि स्विस के सरकारी वकील का कहना है कि अगर ज़रदारी को छूट नहीं भी मिली होती तो भी तब तक कार्रवाई नहीं की जा सकती जबतक कि कोई ऐसा करने के लिए न कहे.

इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता हारून रशीद के अनुसार भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी के वकील आबिद ज़ुबेरी ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तेख़ार मोहम्मद चौधरी के नेतृ्त्व में सात सदस्यी खडपीठ को लिखित तौर पर जानकारी दी है मुक़दमों को दोबारा खोलने के लिए स्विस सरकार को पत्र लिखा गया है.

भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी के प्रमुख नवेद अहसन का कहना है कि स्विस अधिकारियों को लिखे गए पत्र की जानकारी गृह मंत्रालय को भी दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट में भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी से जुड़े मामलों को गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया है.

दरअसल पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर भ्रष्ट्राचार निरोधक एजेंसी के प्रमुख नावेद अहसान देश में भ्रष्ट्राचार के सैकड़ों मामलों को दोबारा नहीं खोलेंगे तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा. एजेंसी ने अपना क़दम कोर्ट के इसी बयान के बाद उठाया है.

कोर्ट ने कहा था कि अगर नेशनल एकाउंटिबिलीटी ब्यूरो के प्रमुख नावेद अहसान अगले 24 घंटों में अदालत की बात नहीं मानेंगे तो इसे अदालत की अवमानना समझा जाएगा.

भ्रष्ट्राचार निरोधक एजेंसी के वकील आबिद ज़ुबैरी ने बताया," कोर्ट के निर्देश के बाद एजेंसी ने अपनी प्रक्रिया शुरु कर दी है."

माफ़ी का फ़रमान

वर्ष 2007 में कई पाकिस्तानी राजनेताओं और अधिकारियों को मिली आम माफ़ी के चलते इन लोगों के ख़िलाफ़ आरोप अमान्य हो गए थे लेकिन कोर्ट ने इस फ़ैसले को अवैध करार दिया था.कोर्ट का कहना है कि इन लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमे दोबारा शुरु हों.

इसमें राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी समेत कई लोग शामिल है. राष्ट्रपति बनने से पहले ज़रदारी कई सालों तक जेल में थे और उन पर भ्रष्ट्राचार के कई आरोप लगे थे. हालांकि ज़रदारी का कहना है कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित थे.

पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशरर्फ़ ने अपने कार्यकाल के दौरान कई नेताओं और अधिकारियों को आम माफ़ी दी थी. 90 के दशक के दौरान इन लोगों पर कई तरह के आरोप लगे थे.

इसी माफ़ीनामे को बेनज़ीर भुट्टो और परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच सत्ता को लेकर हुए समझौते का आधार माना जाता है. बेनज़ीर भुट्टो की दिसंबर 2007 में हत्या कर दी गई थी.

नेताओं और अधिकारियों को माफ़ी देने के फ़ैसले को कोर्ट ने अवैध करार दिया है.

ये बात 2009 में ही सामने आई थी कि आठ हज़ार से ज़्यादा राजनेताओं और अधिकारियों को माफ़ीनामे से फ़ायदा हुआ है.

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