खदान में फंसे खनिक सुरक्षित बाहर आए

चीन की कोयला खदान
Image caption चीन के शैंशी प्रांत की कोयला खदान में फंसे खनिकों को बाहर निकाला गया

चीन की एक कोयला खदान से 115 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है.

उत्तरी शैंशी प्रांत की इस खदान में काम कर रहे खनिकों ने 28 मार्च को जब एक दीवार फोड़ी तो खदान में तेज़ी से पानी भर गया.

कुछ खनिक अपनी पेटी की मदद से अपने को खदान की दीवार से बांध कर डूबने से बचने में सफल रहे.

सरकारी प्रसार माध्यमों का कहना है कि 153 लापता खनिकों में से 115 को बचा लिया गया है.

टेलीविज़न पर इन खनिकों को खदान से निकाल कर अस्पताल ले जाते दिखाया गया.

चीन की खदाने इस तरह की दुर्घटनाओं के लिए बदनाम हैं इसलिए इतने खनिकों की जान बच जाना खदान उद्योग के लिए अच्छी ख़बर है.

खदान में फंसे इन खनिकों तक पहुंचने के लिए पिछले एक सप्ताह से क़रीब 3,000 लोग चौबीसों घंटे लगे हुए थे.

आंखों पर पट्टी

सोमवार की दोपहर को जब पहले नौ खनिकों को एक एक करके स्ट्रेचर पर लिटा कर बाहर लाया गया तो खदान के मुख्यद्वार पर खड़े लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया.

इन खनिकों की आंखों पर पट्टी बांध कर उन्हे ऊपर लाया गया क्योंकि इतने दिन अंधेरे में रहने के बाद तेज़ रोशनी से उनकी आंखों को नुक़सान पहुंच सकता था.

शैंशी प्रांत के गवर्नर वान जुन ने कहा, "दो चमत्कार हुए हैं. पहला ये कि ये खनिक आठ दिन और आठ रातों तक ज़मीन के भीतर जीवित रहे. और दूसरा हमारा बचाव कार्य सफल रहा जो कि चीन के बचाव इतिहास में एक चमत्कार से कम नहीं."

शैंशी प्रांत के लिनफ़ैन अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी लिउ चियांग ने बताया, "इन खनिकों का शारीरिक तापमान बहुत नीचे चला गया है, इतने लंबे समय तक पानी के भीतर रहने के कारण त्वचा में संक्रमण है."

एक खनिक ने बताया कि खनिक इतने दिन बिना पानी पिए रहे क्योंकि जो पानी सुरंग में भरा हुआ था वो बहुत गंदा था और उसे पीना ख़तरनाक हो सकता था.

जब पानी तेज़ी से खदान में भरने लगा तो खनिकों ने पेटी से अपने को खदान की दीवार से बांध लिया. वो तीन दिनों तक इसी तरह बंधे रहे.

बचाव कार्य

हज़ारों बचावकर्मी खदान में से पानी निकालने में जुटे हुए थे और रविवार तक पानी का स्तर 30 फ़ुट नीचे गिर गया.

शुक्रवार को जब बचाव कर्मियों को खदान के भीतर से आवाज़ें सुनाई दीं तो ये आशा जगी कि लोग जीवित हो सकते हैं.

कुल 153 खनिक नीचे फंसे हुए थे लेकिन परिवारजनों का कहना है कि इससे अधिक लोग खदान में काम कर रहे थे.

आरंभिक जांच से पता चला था कि खदान अधिकारियों ने पानी के रिसाव की चेतावनी की उपेक्षा की थी.

चीन की अर्थव्यवस्था काफ़ी हद तक कोयले पर निर्भर है और चीन की खदानें दुनिया में सबसे ख़तरनाक समझी जाती हैं.

चीन में होने वाली अधिकतर खदान दुर्घटनाएं सुरक्षा नियमों का पालन न करने के कारण होती हैं

हालांकि पिछले कुछ सालों में चीन की सरकार ने सुरक्षा उपायों में सुधार के प्रयास किए हैं जिसकी वजह से वर्ष 2009 में 1,616 दुर्घटनाओं में 2,631 खनिक मारे गए. जो कि वर्ष 2008 के मुक़ाबले 18 प्रतिशत कम है.