वक़्त की पाबंदी के लिए बोनस

बोलीविया
Image caption बोलीविया में वक़्त की पाबंदी के लिए आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाने वाला है

आप दुनिया के किसी भी शहर में हों सुबह सात बजे से नौ बजे के बीच आप ख़ुद को ट्रैफ़िक जाम में फंसा पाते हैं.

लेकिन बोलीविया के ला पाज़ शहर में ऐसा नहीं है. वहाँ नौ बजे ही सारी भीड़ शुरू होती है.

लोग उसी समय काम पर जाने के लिए निकलते हैं, हालांकि उन्हें अपने दफ़्तर या फ़ैक्ट्री में आधे या एक घंटे पहले होना चाहिए था.

इस पुरानी सुस्ती या देर करने की बीमारी को 'बोलीवियाई समय' के नाम से जाना जाता है और अब सरकार इससे निपटने के लिए उन कर्मचारियों को बोनस देने जा रही है जो वक़्त के पाबंद हैं.

ला पाज़ के एक टैक्सी चालक सैमुएल मेंडोज़ा ख़ुद को अपवाद मानते हैं. वे कहते हैं कि चूँकि उन्हें विदेशियों के साथ काम करना पड़ता है, इसलिए उन्हें मजबूरन वक़्त की पाबंदी करनी पड़ती है.

मेंडोज़ा अपने साथियों को अच्छी तरह जानते हैं और उनके अनुसार देर हो जाना उनकी ड्यूटी में शामिल है.

उन्होंने कहा, "बोलीवियाई वास्तव में ग़ैरज़िम्मेदार हैं, यहाँ वक़्त की पाबंदी का कोई चलन नहीं है, वे न तो काम पर ही समय से पहुंचते हैं और न ही किसी और जगह. ऐसा लगता है वे अपनी कलाइयों पर घड़ी नहीं पहनते हैं."

उन्होंने कहा, "यह बस बोलीवियाई है."

यह सच है अगर आपको किसी किसी ख़ास समय पर मिलने के लिए कहा गया है तो जान लीजिए कि अगर आप वाक़ई क़िस्मत वाले हैं तो वह आदमी आपको 30 मिनट बाद नज़र आएगा.

लेकिन अब बोलीवियाई सरकार का सोचना है कि इसमें बदलाव आना चाहिए. सरकार मेहनत-मज़दूरी में सुधार पर काम कर रही है इसके अलावा यह देर से आने के इस राष्ट्रीय चलन को बदलने का इरादा रखती है.

'राष्ट्रीय बीमारी'

और सरकार का मानना है कि इसमें बदलाव लाने का बस एक ही रास्ता है कि लोगों को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाए. दक्षिण अमरीका के बोलीविया जैसे एक ग़रीब देश में अतिरिक्त पैसे देने का मतलब बहुत से लोगों के लिए काफ़ी मायने रखता है.

Image caption बोलीविया के राष्ट्रपति को भी देर करने की राष्ट्रीय आदत है

बोलीविया के श्रम मंत्रालय के एक वकील विक्टर ह्यूगो चावेज़ ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "बोलीवियाई परंपरागत तौर पर वक़्त की पाबंदी के लिए नहीं जाने जाते हैं. इसलिए जो बोलीवियाई हर दिन समय से काम पर पहुंचते हैं उन्हें वक़्त की पाबंदी का बोनस दिया जाएगा."

और इससे अर्थव्यवस्था पर काफ़ी प्रभाव पड़ेगा. लेकिन राष्ट्रपति इवो मोराल्स की सरकार का माना है कि बोलीवियाई नगरिकों में समय की पाबंदी न होने और समय की बर्बादी के कारण देश को लाखों डॉलर का नुक़सान उठाना पड़ता है.

चावेज़ ने कहा, "हमें उम्मीद है कि इससे समय की पाबंदी बढ़ेगी जोकि हमारे जैसे ग़रीब देश के आर्थिक विकास के लिए काफ़ी अच्छा होगा."

कहा जाता है कि इस महीने यह क़ानून बिना किसी बड़े बदलाव के पारित हो जाएगा क्योंकि मोराल्स की पार्टी कांग्रेस में बहुमत में है.

कहा जाता है कि इस राष्ट्रीय परंपरा का शिकार राष्ट्रपति मोराल्स ख़ुद भी हैं क्योंकि वह अकसर रैलियों और जन सभाओं में देर से पहुंचते हैं.

एक बार ऐसा हुआ की सारे पत्रकार जिनमें मैं भी शामिल था ग़ुस्से में उनके महल से बाहर आ गया क्योंकि उन्होंने एक पत्रकार सम्मेलन के लिए हमें तक़रीबन दो घंटे इंतिज़ार करवाया था.

इसी तरह अन्य सरकारी काम भी लेट-लतीफ़ी का शिकार हैं. लापाज़ में जिस सड़क पर एक महीना पहले एक सुरंग बन जानी थी वह अब जाकर कहीं पूरी हुई है.

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