भ्रष्टाचार, महंगाई के ख़िलाफ़ हिंसक प्रदर्शन

किरगिस्तान में प्रदर्शन
Image caption किरगिस्तान को आज़ादी मिलने के बाद से ही आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है

किरगिस्तान में सरकार विरोधी हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार और महंगाई के ख़िलाफ़ राजधानी बिशकेक में राष्ट्रपति कार्यालय के सामने हिंसक प्रदर्शन किए हैं.

प्रत्यक्षदर्शियों और चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई हैं जिसमें चार प्रदर्शनकारी मारे गए हैं.

मध्य एशिया में स्थित किरगिस्तान वर्ष 1991 में सोवियत रूस के विघटन के साथ आज़ाद हुआ था. स्वतंत्रता मिलने के बाद से ही देश आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहा है.

अलग देश बनने के बाद व्यापार में कमी आई जिसके नतीजे में सरकार ने अधिकतर सामानों पर से जारी सब्सिडी हटा ली और वेल्यू एडेड टैक्स प्रणाली शुरुआत की.

लेकिन वर्ष 2005 में सत्ता में आई राष्ट्रपति कुरमाबेक बाकियोफ़ की सकार से लोगों को आशा थी, लेकिन भी वो जनता का विश्वास पाने में क़ामयाब नहीं रहे हैं.

'राज द्रोह'

स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने राजधानी बिशकेक, तलास और नार्यन में आपात स्थिति की घोषणा कर दी है और विपक्षी पार्टी के अनके बड़े नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

इन तीनों शहरों में प्रदर्शनकारी सरकारी भवनों और दफ़्तरों को अपने क़ब्ज़े में लेने की कोशिश कर रहे हैं.

ख़बरें हैं कि बिशकेक में कुछ प्रदर्शनकारी हथियारों से लैस हैं.

सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति कुरमाबेक बाकियोफ़ भ्रष्टाचार पर क़ाबू पाने में असमर्थ रहे हैं.

उधर प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनों को राज द्रोह क़रार देते हुए स्वीकार किया है कि स्थिति को क़ाबू में रखने के लिए सरकार के पास पर्याप्त पुलिस बल नहीं है.

इससे पहले मगंलवार को हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने तलास शहर में सरकारी दफ़्तरों के सामने बड़ा प्रदर्शन किया था.

किरगिस्तान में रूस और अमरीका के सैन्य अड्डे हैं और दोनों देशों ने किरगिज़ के लोगों से शांति की अपील की है.

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