विपक्ष ने बनाई 'जनता की सरकार'

प्रदर्शन
Image caption अमरीका ने प्रदर्शनकारियों की आलोचना की है जबकि रूस ने इसमें अपनी भूमिका से साफ़ इनकार किया है

मध्य एशियाई देश किर्गिस्तान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में खूनखराबे और 65 लोगों के मारे जाने के बाद विपक्ष ने दावा किया है कि ‘जनता की सरकार’ का गठन हो रहा है.

राष्ट्रपति कुरमानबेक बाकियेव का कोई अतापता नहीं है लेकिन कुछ रिपोर्टों के अनुसार वे राजधानी बिशकेक एक अन्य मंत्री के साथ एक विमान में देश के दक्षिणी क्षेत्र में भाग गए हैं.

देश की पूर्व विदेश मंत्री और विपक्ष की प्रमुख नेता रोज़ा ओटुनबायेवा ने बीबीसी को बताया है कि अंतरिम सरकार छह महीने तक सत्ता में रहेगी और देश का नया संविधान बनाएगी. उनका कहना है कि नए रक्षा और गृह मंत्रियों की नियुक्ति कर दी गई है.

विपक्ष के प्रदर्शन देश में बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार और विपक्षी नेताओं की गिरफ़्तारी के विरोध में, तीन बड़े शहरों में प्रदर्शन शुरु हुए थे और फिर अन्य क्षेत्रों में फैल गए.

तख़्तापलट करने वाले विपक्षी नेताओं ने लोगों के आग्रह किया है कि वे अपदस्त सरकार के मंत्रियों और अन्य लोगों को खोज निकालें और उन्हें गिरफ़्तार कर लें. वे विशेष तौर पर राष्ट्रपति कुरमानबेक बाकियेव की गिरफ़्तारी चाहते हैं.

नए नेताओं ने राजधानी बिशकेक में सरकार के मुख्यालय पर कब्ज़ा कर लिया है. वहाँ एक रात पहले तक अराजकता की स्थिति थी और चारों ओर से लूटपाट, गोलीबारी और आगज़नी की ख़बरें आ रही थीं. बिशकेक में बीबीसी के रेयहान देमेत्राय का कहना था कि प्रदर्शनकारियों ने पूरे बिशकेक शहर में लूट मचा रखी थी.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि व्यापक हिंसा में 400 से 495 लोग घायल हुए हैं. गुरुवार सुबह राजधानी बिशकेक में स्थिति शांतिपूर्ण है.

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण

किर्गिस्तान मध्य एशिया में सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण देश है. वहाँ अमरीका का सैन्य अड्डा है जहाँ से अफ़गानिस्तान में उसके सैनिकों को मदद दी जाती है. वहां रुस का भी एक सैनिक अड्डा है.

अमरीका ने प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि लोगों को क़ानून का पालन करना चाहिए और साथ ही स्पष्ट किया था कि वो अभी भी मानता है कि देश में सरकार का नियंत्रण है.

रुस के प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन ने आंदोलन में रूस की किसी भी भूमिका से इनकार किया और कहा कि यह किर्गिस्तान का घरेलू मसला है और इस मामले में सभी को संयम बरतना चाहिए.

उधर रुस के राष्ट्रपति दीमित्री मेदवेदेव का कहना था कि प्रदर्शन दर्शाते हैं कि लोग वर्तमान सरकार से कितने नाराज़ थे.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के एक प्रवक्ता ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत की अपील की थी.

टीवी चैनल पर कब्ज़ा

बुधवार को विपक्ष ने एक टीवी चैनल पर भी कब्ज़ा कर लिया. इसी चैनल के ज़रिए विपक्ष ने घोषणा की कि वो जनता की सरकार का गठन कर रहा है जिसका नेतृत्व पूर्व विदेश मंत्री रोज़ा ओटुनबायेवा करेंगी.

ओटुनबायेवा ने अपने भाषण में कहा, "अब शक्ति लोगों की सरकार के हाथ में है. ज़िम्मेदार लोगों को नियुक्त किया गया है और वो जनजीवन सामान्य करने की दिशा में काम कर रहे हैं."

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति बाकियेव भी 2005 में ऐसे ही एक आंदोलन के ज़रिए सत्ता में आए थे जिसे ट्यूलिप रिवोल्यूशन का नाम दिया गया था लेकिन बाद में बाकियेव के कई सहयोगियों ने उन पर भ्रष्टाचार और धमकाने का आरोप लगाते हुए उनका साथ छोड़ दिया था.

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