ग़ैर ब्रितानी नागरिक भी डालते हैं वोट

बिग बेन
Image caption घड़ी राजनीतिक फ़ैसले की

ब्रिटेन में इस बार के आम चुनाव में दो प्रमुख पार्टियों लेबर और कंज़र्वेटिव्स के बीच कड़ा मुक़ाबला है. वैसे लिबरल डेमोक्रेट्स मुक़ाबले को त्रिकोणीय बनाने के लिए एड़ी-चोटी का पसीना बहाए हुए है. प्रस्तुत है ब्रितानी चुनाव व्यवस्था के बारे में प्रमुख तथ्य-

चुनाव कब और क्यों

भारत के समान ब्रिटेन में भी हर पाँचवें साल आम चुनाव होता है, लेकिन चुनाव की तारीख़ प्रधानमंत्री की इच्छा से तय होती है.

इसी बार का उदाहरण लें तो 6 मई को चुनाव कराने का फ़ैसला प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन का है, वरना संसद का कार्यकाल 3 जून 2010 तक का है.

6 मई को दिन गुरुवार है जो कि आमतौर पर मतदान का दिन होता है. वैसे ये कोई बाध्यता नहीं है.

लेकिन इस बात की बाध्यता ज़रूर है कि चुनाव सप्ताहांत या सार्वजनिक अवकाश के दिन नहीं हो.

मत-पत्रों के ज़रिए जनादेश

ब्रिटेन में अब भी काग़ज़ के मतपत्रों के ज़रिए वोटिंग होती है. जिस पर उम्मीदवारों का नाम वर्णवार यानि एबीसीडी के हिसाब से लिखे होते हैं.

मतदाता अपने पसंद के उम्मीदवार के नाम के आगे बने चौकोर खाने में क्रॉस का निशान लगाता है. वोटों की गिनती भी हाथों से ही होती है.

जालसाज़ी रोकने के लिए हर मतपत्र पर एक किनारे में अपनी अलग संख्या लिखी होती है.

नागरिक नहीं, फिर भी वोटर

ब्रिटेन के चुनावों में भी भारत की ही तरह मत डालने का अधिकार 18 साल की उम्र में मिलता है. आधिकारिक अनुमानों के अनुसार क़रीब साढ़े चार करोड़ ब्रिटेन वासी 6 मई को मतदान करने की पात्रता रखते हैं. आपने ग़ौर किया होगा कि मैंने ब्रिटेनवासी लिखा है, ब्रिटेन के नागरिक नहीं.

दरअसल ब्रिटेन के चुनावों में ब्रितानी नागरिकों के अलावा आयरलैंड और राष्ट्रमंडल के देशों के उन लोगों को भी वोट डालने का अधिकार है जिन्होंने मतदाता के रूप में ख़ुद को यहाँ रजिस्टर्ड करा रखा है.

इसीलिए एक भारतीय होने के बाद भी मैं यहाँ होने वाले स्थानीय, संसदीय और यूरोपीय चुनावों में वोट डाल पाता हूँ.

मतदाता सूची और वोटर कार्ड

ब्रिटेन का चुनाव आयोग हर साल मतदाता सूची को अद्यतन बनाता है. फिर भी घर बदलने या किसी अन्य कारण से किसी का नाम छूट गया हो तो वो चुनाव से एक पखवाड़े पहले तक वोटर के रूप में ख़ुद को रजिस्टर्ड करा सकता है.

हर रजिस्टर्ड वोटर के घर में वोटिंग कार्ड भेजे जा रहे हैं. कार्ड में उस वोटर विशेष के मतदान केंद्र का नक्शा और ज़रूरी टेलीफ़ोन नंबर आदि छपे होते हैं. वैसे किसी का वोटिंग कार्ड खो गया हो तो किसी अन्य पहचान पत्र के साथ वो मतदान केंद्र में जाकर वोट डाल सकता है.

जिन्होंने डाक के ज़रिए अपना वोट डालने की प्राथमिकता दर्ज करा रखी है उनके घर डाक मतपत्र भेजे जाएँगे.

प्रॉक्सी वोट और वोटिंग पर पाबंदी

Image caption लिबरल डेमोक्रेट्स मुक़ाबले को त्रिकोणीय बनाने के प्रयास में

ब्रिटेन में प्रॉक्सी वोट की भी व्यवस्था है. यानि किसी वोटर को चुनाव के दिन अचानक बाहर जाना पड़ रहा है, या उसे अचानक अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, तो अपने प्रतिनिधि के ज़रिए अपना मतदान कर सकता है. हालाँकि कोई वोटर सिर्फ़ एक ही चुनाव में प्रॉक्सी वोट कर सकता है.

सज़ा काट रहे क़ैदी, पिछले पाँच वर्षों के दौरान चुनावी भ्रष्टाचार के लिए दोषी पाए गए व्यक्ति, वैसे लोग जो कि अपनी असामान्य मानसिक स्थिति के कारण तार्किक फ़ैसले करने में अक्षम हैं और संसद के उच्च सदन हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स के सदस्यों को आम चुनाव में वोट डालने का अधिकार नहीं है.

उम्मीदवार और सीटें

इस बार संसद के निचले सदन यानि हाउस ऑफ़ कॉमंस के लिए 650 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि 2005 के चुनावों में 646 सीटों पर ही चुनाव हुए थे, लेकिन परिसीमन के बाद उस संख्या में चार सीटें और जुड़ गई हैं.

ब्रिटेन में बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था है, लेकिन मुख्य तौर पर मुक़ाबला तीन दलों लेबर पार्टी, कंजर्वेटिव्स और लिबरल डेमोक्रेट्स में होता है. लेकिन किसी भी सीट पर 18 वर्ष या उसके अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है.

इसके लिए सिर्फ़ इतना ज़रूरी है कि वह उस क्षेत्र के 10 वोटरों के हस्ताक्षर और 500 पाउंड के शुल्क के साथ अपना नामांकन-पत्र दाखिल करे. ब्रिटेन में रह रहे राष्ट्रमंडल देशों और आयरलैंड के लोगों को भी चुनाव लड़ने का अधिकार है.

सैनिक, पुलिसकर्मी और अन्य सरकारी कर्मचारी, दिवालिया हो चुके लोग और हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स के सदस्य आम चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकते हैं.

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