क्या नया होगा इस ब्रितानी चुनाव में

ब्रिटिश चुनाव का बैलट पेपर
Image caption ब्रितानी चुनावों का मतपत्र

इस चुनाव के परिणाम चाहे जो भी हों, ये तय है कि ब्रितानी चुनावों के इतिहास में बुहत सारी नई बातें ज़रूर जुड़ेंगी.

डेविड कैमरन की पार्टी अगर इस बार के ब्रितानी चुनावों में सत्ता में आती है, तो वे प्रसिद्ध ईटन स्कूल से आने वाले 19वें प्रधानमंत्री होंगे.

ईटन ब्रिटेन का सबसे अभिजात शिक्षण संस्थान माना जाता है जहाँ ब्रितानी उच्च वर्ग के चुनिंदा बच्चे पढ़ते हैं.

इसके अलावा अगर इस चुनाव में कैमरन की पार्टी बहुमत हासिल कर लेती है तो यह 1945 के बाद से कंज़रवेटिव पार्टी के पक्ष में आया सबसे बड़ा चुनावी स्विंग होगा.

चुनाव के परिणाम कुछ भी हों, एक बात तय है कि बहुत सारे पुराने चेहरे संसद में नज़र नहीं आएँगे, बल्कि नए चेहरों की भरमार होगी.

डेढ़ सौ सांसद बाहर

इसका कारण ये है कि एक्सपेंस क्लेम यानी भत्ते की सुविधा के दुरुपयोग के मामले में बदनामी के बाद दोनों पार्टियों के लगभग डेढ़ सौ सांसद ऐसे हैं, जो इस चुनाव में उम्मीदवार नहीं होंगे.

ऐसा भी माना जा रहा है कि भत्ता दुरुपयोग मामले से नाराज़ वोटरों का एक वर्ग यूकिप, रेस्पेक्ट और बीएनपी जैसी छोटी पार्टियों की ओर जा सकता है, यानी इस बार संसद में तीन प्रमुख दलों के अलावा दूसरी पार्टियों को भी कुछ प्रतिनिधित्व मिल सकता है.

इस चुनाव की एक ख़ास बात ये भी है कि प्रधानमंत्री पद के तीनों दावेदार पहली बार अपनी पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं. लेबर पार्टी ने पिछला चुनाव टोनी ब्लेयर के नेतृत्व में जीता था जबकि डेविड कैमरन और निक क्लेग 2005 के चुनाव के बाद अपने पार्टी के नेता चुने गए हैं.

यह पहला मौक़ा है जबकि अमरीकी चुनाव की तर्ज़ पर प्रधानमंत्री पद के तीनों उम्मीदवार आमने-सामने लाइव टीवी डिबेट में हिस्सा ले रहे हैं, स्काई टीवी, आईटीवी और बीबीसी पर एक-एक यानी कुल तीन ऐसी लाइव बहसें प्रसारित की जाएँगी.

कनेक्टेड चुनाव

इस चुनाव को ब्रिटेन का पहला कनेक्टेड इलेक्शन कहा जा रहा है, यानी माना जा रहा है कि ज्यादातर वोटर इंटरनेट की सेवाओं से जुड़े हुए हैं, इसलिए तीनों राजनीतिक दल चुनाव प्रचार में फ़ेसबुक और ट्विटर जैसी वेबसाइटों की मदद ले रहे हैं.

पिछले तेरह साल से सत्ता से बाहर रही कंज़रवेटिव पार्टी के ज्यादातर वरिष्ठ नेता रिटायर हो चुके हैं और उनकी मौजूदा टीम में सिर्फ़ तीन लोग ऐसे हैं जो पहले मंत्री रह चुके हैं.

अगर गॉर्डन ब्राउन नंबर टेन डाउनिंग स्ट्रीट में बने रहते हैं तो यह उनके लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी होगी और लेबर पार्टी लगातार चौथी बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बना डालेगी. वह भी ऐसी स्थिति में जबकि ब्रिटेन दूसरे महायुद्ध के बाद की सबसे गहन आर्थिक मंदी में फँसा हुआ है.

बहुत साल के बाद यह चुनाव ऐसा है जिसमें हंग पार्लियामेंट यानी त्रिशंकु संसद के सामने आने की चर्चा चल रही है, ऐसी स्थिति जब किसी दल के पास सरकार बनाने लायक़ बहुमत नहीं होगा, ऐसा पिछली बार 1974 में हुआ था.

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