थाइ प्रधानमंत्री पर दबाव बढ़ा

अभिसित विज्जे जीवा
Image caption थाइ प्रधानमंत्री अभिसित विज्जेजीवा पर दबाव बढ़ा

थाइलैंड के चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री की डेमोक्रेटिक पार्टी को भंग करने की मांग उठाई और सेनाध्यक्ष ने संसद भंग किए जाने का सुझाव दिया.

थाइलैंड के चुनाव आयोग ने वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में प्रधानमंत्री अभिसित विज्जेजीवा की डेमोक्रेटिक पार्टी को भंग करने की मांग उठाई है.

देश में जारी राजनीतिक विवाद से जूझ रहे थाईलैंड के प्रधानमंत्री अभिसित विज्जेजीवा पर चुनाव आयोग की इस मांग के बाद और दबाव बढ़ गया है.

इससे पहले थाइलैंड के सेनाध्यक्ष जनरल अनुपौंग पाओजिंदा ने संसद भंग करने किए जाने की मांग रखी थी.

उनका कहना था कि थाइलैंड में जारी राजनीतिक विवाद का हल ढूंढना ज़रूरी है, "इस विवाद को राजनीतिक तरीके से निपटाना होगा. संसद भंग करने से इस विवाद का हल हो जाएगा, लेकिन संसद को कब भंग किया जाए ये बातचीत के नतीजे से ही पता चलेगा."

पिछले महीने भर से थाइलैंड में प्रदर्शनकारी सरकार गिराने और नए चुनावों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

लेकिन प्रधानमंत्री विज्जेजीवा ने ये कहा है कि उनकी सरकार संसद भंग नहीं करेगी.

हालांकि पहले प्रधानमंत्री ने ये कहा था कि सरकार और सेना इस राजनीतिक विवाद के बीच एकजुट हैं.

संवाददाताओं के मुताबिक जनरल अनुपौंग के इस वक्तव्य से सेना और सरकार के बीच उभर रहे मतभेदों के संकेत मिल रहे हैं.

पिछले दो दिनों से बैंकॉक में प्रदर्शनकारियों के साथ हो रही ख़ूनी झड़पों पर अंकुश लगाने में सेना की नाकामी के बाद जनरल पाओजिंदा ने संसद भंग किए जाने की मांग उठाई.

शनिवार को राजधानी बैंकॉक में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों में 20 से ज़्यादा लोग मारे गए और कई घायल हुए.

ख़ूनी संघर्ष

'रेड शर्ट' के नाम से चर्चित सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर सैनिकों और दंगा पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियाँ चलाईं.

जवाब में प्रदर्शनकारियों ने पेट्रोल बम फेंके. बाद में प्रधानमंत्री अभिसित विज्जेजीवा ने यह जानकारी दी कि सेना ने अपना अभियान रोक दिया है.

राष्ट्रीय टेलिविज़न पर दिए अपने संदेश में प्रधानमंत्री अभिसित विज्जेजीवा ने इन ख़ूनी झड़पों की जांच करवाने की घोषणा की.

सोमवार सुबह प्रदर्शनकारियों ने मृतकों के ताबूतों को सड़कों पर घुमाया. ज्यादातर ताबूत ख़ाली थे लेकिन कम से कम दो ताबूतों में शव रखे हुए थे.

इसके अलावा सोमवार को राजधानी में नए सिरे से झड़पों की ख़बरें नहीं मिली है.

रैड शर्ट अभी भी बैंकॉक के महत्ववपूर्ण भागों पर कब्ज़ा किए हए हैं और सैनिकों के पीछे हटने के बाद से वे और भी मज़बूत स्थिति में आ गए हैं.

विरोध प्रदर्शन

इनमें से अधिकतर लोग थाइलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री टकसिन चिनावाट के समर्थक हैं जिन्हें सितंबर, 2006 में एक सैन्य विद्रोह के बाद हटा दिया गया था.

सैन्य विद्रोह के बाद दिसंबर 2007 में पहली बार चुनाव हुए जिसमें चिनावाट समर्थकों की जीत हुई.

लेकिन 'येलो शर्ट' समर्थकों ने एक साल बाद विरोध शुरू कर दिया जिसके बाद दिसंबर 2008 में चिनावाट के सहयोगियों की सरकार गिर गई और अभिसित विजयजीवा ने सरकार बनाई.

इसके दो साल बाद मार्च 2010 में 'रेड शर्ट' समर्थकों ने विज्जेजीवा सरकार को गिराने के लिए व्यापक विरोध शुरू कर दिया है.

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