बेनज़ीर की हत्या रोकी जा सकती थी: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र की टीम ने पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की जाँच रिपोर्ट में कहा है कि यदि पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम किए गए होते तो बेनज़ीर की हत्या को रोका जा सकता था.

रिपोर्ट में परवेज़ मुशर्रफ़ की तत्कालीन सैन्य सरकार की कड़ी आलोचना की गई है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अधिकारियों ने क़त्ल की ठीक तरीके से जाँच नहीं की है.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि वो ये नहीं मानते कि बेनज़ीर के क़त्ल के बाद जब घटनास्थल को पानी से धो दिया गया था तो वो काम पुलिस प्रमुख ने बिना उच्च अधिकारियों से पूछे बगैर किया था.

27 दिसंबर 2007 को रावलपिंडी के लियाक़त अली पार्क में एक चुनावी रैली के दौरान बेनज़ीर भुट्टो की हत्या कर दी गई थी. उस हमले में लगभग 20 अन्य लोग भी मारे गए थे और अनेक घायल हुए थे.

'ज़रदारी को लेकर सबूत नहीं'

जाँच समिति से पत्रकारों के सवाल जवाब के दौरान ये भी पूछा गया कि कुछ लोगों में ये धारणा थी कि हत्या के पीछे आसिफ़ अली ज़रदारी का हाथ था. इसके जवाब में जाँच समिति के अध्यक्ष ने कहा कि इन आरोपों का कोई आधार नहीं मिला.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक कई पाकिस्तानी मानते हैं कि हो सकता है कि बेनज़ीर की हत्या शायद तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और पाकिस्तानी सेना ने करवाई है.

पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की जाँच के लिए संयुक्त राष्ट्र ने एक जाँच आयोग का गठन किया था और चिली में संयुक्त राष्ट्र के राजदूत बेरॉल्डो मेनोज़ को इसका अध्यक्ष बनाया गया था.

जाँच आयोग के सदस्यों ने इसी वर्ष फ़रवरी में पाकिस्तान की तीन दिवसीय यात्रा की थी.इस आयोग के सदस्यों ने बेनज़ीर भु्ट्टो की हत्या की जाँच के लिए पाकिस्तान के तीन दौरे किए.

ये जाँच नौ महीनों तक चली और इस दौरान परवेज़ मुशर्रफ़ से भी बात की गई.

इस जांच का दायरा हत्या से जुड़े तथ्यों और हालातों का जायज़ा लेना है, हत्या की ज़िम्मेदारी तय करना इस जांच के दायरे में शामिल नहीं है.

पिछले महीने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने अपील की थी कि रिपोर्ट जारी किए जानी की तारीख़ टाल दी जाई.

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