उड़ानों पर पाबंदी में रियायत

एयरपोर्ट

आइसलैंड के ज्वालामुखी के कारण यूरोप में पाँच दिनों तक हवाई उड़ानें बंद रहने के बाद अब कई देशों ने पाबंदियों को कम करने की घोषणा की है.

ब्रिटेन, जर्मनी, फ़्रांस और बेल्जियम की सरकारों ने कहा है कि वे मंगलवार से अपने हवाई क्षेत्र में विमानों का आवागमन शुरू करेंगे.

यूरोप के दूसरे कई देशों – ऑस्ट्रिया, एस्टोनिया, फ़िनलैंड, हंगरी और तुर्की में भी हवाई अड्डे खोल दिए गए हैं.

मगर इटली में अधिकारियों ने उत्तरी क्षेत्र में अपने हवाई क्षेत्र को मंगलवार सुबह तक बंद रखा हुआ है.

पूर्वोत्तर यूरोप के अधिकतर देशों में लगातार पाँच दिनों तक विमानों के उड़ने पर पाबंदी लगाए जाने को लेकर विमान सेवाओं के प्रमुखों ने इन देशों की सरकारों की कड़ी आलोचना शुरू कर दी थी.

हवाई सेवा कंपनियों का कहना है कि इस पाबंदी से उनका घाटा बढ़कर एक अरब डॉलर तक पहुँच चुका है.

घोषणा

हवाई सेवा कंपनियों की तीख़ी आलोचना के बाद सोमवार को कई देशों में विमानों का परिचालन शुरू करने की घोषणाएँ हुईं.

यूरोपीय संघ के यातायात मंत्रियों ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से विचार-विमर्श करने के बाद कहा है कि यूरोपीय हवाई क्षेत्र में अब तीन तरह के क्षेत्रों को निर्धारित किया जाएगा.

इनमें एक हवाई क्षेत्र में कोई विमान नहीं जा सकेगा, दूसरे क्षेत्र में सभी विमान जा सकेंगे और तीसरे क्षेत्र में कुछ विमानों को जाने की अनुमति होगी.

ब्रिटेन में हवाई यातायात अधिकारियों ने कहा है कि वे मंगलवार को स्कॉटलैंड, उत्तरी आयरलैंड और उत्तरी इंग्लैंड में उड़ानों के शुरू होने की आशा कर रहे हैं.

बेल्जियम और फ़्रांस ने भी कहा है कि वे भी मंगलवार को कुछ विमानों के उड़ने की अनुमति देंगे.

जर्मनी में भी दो विमान सेवाओं को विदेशों में फँसे जर्मन नागरिकों को लाने की अनुमति दी गई है.

जर्मन सरकार ने जर्मन विमान सेवा लुफ़्थांसा को पूर्वी एशिया, अफ़्रीका और अमरीका में फँसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए 50 उड़ानें शुरू करने की अनुमति दी है.

आलोचना

लुफ़्थांसा के उपाध्यक्ष कार्स्टन बेन्ज़ ने बीबीसी से कहा कि उनकी कंपनी ने परीक्षण उड़ानें करवाईं थीं जिससे पता लगा कि राख जितना सोचा जा रहा था उससे कम नुकसानदायक है.

उन्होंने कहा,"लुफ़्थांसा ने शनिवार को दस विमानों को उड़ाया, हमने काफ़ी कड़ा परीक्षण किया और हमने ऐसी कोई बात नहीं पाई कि इंजिनों पर कोई गंभीर असर पडा हो."

इससे पहले इंटरनेशन एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन या आयाटा ने हवाई यातायात में मची अफ़रा-तफ़री को शर्मनाक बताते हुए यूरोपीय नेताओं को जमकर लताड़ा था.

आयाटा के मुख्य कार्यकारी जियोवानी बिसिग्नानि ने कहा,"यूरोपीय देशों ने जो फ़ैसला लिया, वह बिना किसी आकलन के, बिना किसी सलाह के, बिना किसी समन्वय के और बिना किसी नेतृत्व के लिया.

"हमें हर रोज़ 20 से 25 करोड़ डॉलर का नुक़सान हो रहा है, कम-से-कम सात लाख यात्री फँसे हुए हैं और इन यूरोपीय नेताओं को एक टेलिकॉन्फ्रेंस करने में पाँच दिन लग रहे हैं.

"अमरीका में अक्सर ऐसी स्थिति आती है लेकिन वे वहाँ इस तरह की समस्या से इतने शर्मनाक तरीक़े से नहीं बल्कि बहुत कारगर तरीक़े से निबटते हैं. वे साफ़ तौर पर बताते हैं कि किस इलाक़े में जाना है और किस इलाक़े में नहीं, इस तरह उड़ान पूरी तरह बंद नहीं कर देते."

इस बीच आइसलैंड में लगभग दो सौ साल के बाद फटे ज्वालामुखी से अब निकल रही राख की मात्रा बेहद कम हो गई है.

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