ब्रिटेन में चुनावी बहस तेज़ हुई

Image caption ब्राउन, कैमरून और क्लेग

आम चुनाव से ठीक दो हफ़्ते पहले, ब्रिटेन की तीन प्रमुख पार्टियों के नेता टेलिविज़न पर दूसरी बार सीधी चुनावी बहस में शामिल हुए हैं.

मुख्य रूप से विदेश नीति पर केंद्रित इस बहस में लेबर पार्टी की तरफ़ से प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन, कंज़रवेटिव पार्टी की तरफ़ से उनके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार डेविड कैमरून और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के निक क्लेग ने हिस्सा लिया.

ये पहली बार है जब ब्रिटेन के चुनावों में अमरीका की तरह उम्मीदवारों के बीच टीवी पर बहस हो रही है.

विदेश मामलों में अफ़गानिस्तान, जलवायु परिवर्तन, यूरोप और परमाणु हथियारों से जुड़ी नीतियों पर बहस हुई.

नेताओं के बीच ब्रिटेन के परमाणु हथियारों के मामले पर सबसे ज़्यादा मतभेद दिखा और निक क्लेग एकमात्र नेता थे जो परमाणु हथियारों को ख़त्म करने के हक़ में थे.

अफ़गानिस्तान में ब्रिटेन की भूमिका पर प्रधानमंत्री ब्राउन का कहना था कि उन्हें हर रोज़ उस क्षेत्र से अल क़ायदा से जुड़ी योजनाओं की जानकारी मिलती है जिसकी कड़ी पूरी दुनिया से गुज़रती है.

Image caption निक क्लेग के प्रदर्शन से लिबरल डेमोक्रेट्स का पलड़ा भारी हुआ है.

कैमरून का कहना था कि ब्रिटेन को अफ़गानिस्तान युद्द में पहले की गई गलतियों से सीखना होगा वहीं निक क्लेग का कहना था कि ये देखने की ज़रूरत है कि जो रणनीति अबतक अपनाई गई है वो कितनी सही है.

पिछले हफ़्ते हुई पहली बहस में निक क्लेग के प्रदर्शन से चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में लिबरल डेमोक्रेट्स का पलड़ा काफ़ी भारी नज़र आ रहा था.

उनका प्रश्नकर्ताओं को उनके नाम से संबोधित करना लोगों को बहुत पसंद आया और बृहस्पतिवार की बहस में तीनों ही उम्मीदवार उस फ़ॉर्मूले को अपना रहे थे.

गॉर्डन ब्राउन ने बहस की शुरूआत में ही कह दिया कि अगर टीवी पर लोकप्रियता का मुक़ाबला होगा तो वो कहीं नहीं ठहर पाएंगे लेकिन जहां तक देश चलाने की बात है तो वही सही उम्मीदवार हैं.

मुख्य विपक्षी नेता डेविड कैमरून पहली डिबेट के मुक़ाबले काफ़ी सहज नज़र आए और उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ही सही मायने में कोई बदलाव लाने की क्षमता रखती है.

दोनों ही उम्मीदवार लिबरल डेमोक्रेट के निक क्लेग पर निशाना साध रहे थे क्योंकि उनके सितारे काफ़ी बुलंदी पर नज़र आ रहे हैं.

बृहस्पतिवार को भी उनका प्रदर्शन काफ़ी अच्छा रहा और अब सभी की नज़रें चुनाव सर्वेक्षणों पर हैं कि उनकी रेटिंग उपर चढ़ी है या नहीं.

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