'माओवाद का जवाब पंचायती राज'

मनमोहन सिंह
Image caption प्रधानमंत्री ने माओवादियों को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि माओवादियों से निपटने का एक तरीक़ा ये है कि पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से ग़रीबों और पिछड़े तबकों को समर्थ बनाया जाए.

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर आयोजित एक सम्मेलन में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें पंचायती राज व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि दुर्गम और पिछड़े इलाकों में प्रभावी रूप से इसका क्रियान्वयन हो सके. इससे हमें माओवादियों से पेश खतरों से निपटने में मदद मिलेगी.”

उन्होंने कहा कि विभिन्न विकास कार्यक्रमों में पंचायतों की भागीदारी ज़रूरी है क्योंकि वो स्थानीय ज़रूरतों को समझते हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, “पंचायतों का सीधा योगदान समाज के ग़रीब और पिछड़ों की सत्ता में भागीदारी मुमकिन बनाना ही नहीं, बल्कि सरकारी संस्थाओं और कर्मचारियों के काम में पारदर्शिता और उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है.”

याद रहे इससे पहले प्रधानमंत्री कई बार माओवादियों को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बता चुके हैं.

महिलाओं की भागीदारी

आज के ही दिन वर्ष 1993 में 73वें संवैधानिक संशोधन का क्रियान्वयन किया गया था ताकि त्रि-स्तरीय वाली पंचायत व्यवस्था शासन की ज़िम्मेदारी संभाल सके.

उन्होंने कहा कि करीब 600 ज़िला पंचायतों, 6,000 माध्यमिक पंचायतों और 2.3 लाख ग्राम पंचायतों के माध्यम से 28 लाख लोग लोकतंत्र का हिस्सा बन चुके हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि पंचायत व्यवस्था में एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षण अमल में आ चुका है.

उन्होंने कहा कि ये गर्व की बात है कि ग्रामीण भारत में करीब 10 लाख महिलाएँ निर्वाचित प्रतिनधियों के तौर पर काम कर रही हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं के लिए प्रस्तावित 50 प्रतिशत आरक्षण से उनकी संख्या 14 लाख तक पहुँचने की उम्मीद है.

मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें पंचायतों के सामने आ रही मुश्किलों की पूरी जानकारी है.

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