भारतीय फ़िल्मों पर रोक बरक़रार

हिंदी फ़िल्में
Image caption हिंदी फ़िल्मों पर रोक के कारण जाली डीवीडी ख़ूब चलती हैं

बांग्लादेश के फ़िल्म निर्माताओं और सिने कलाकारों का कहना है कि सरकार ने भारतीय फ़िल्मों के प्रदर्शन पर लगी रोक को बरक़रार रखने का फ़ैसला किया है.

उनका कहना है कि अगर सरकार ने रोक हटाने का फ़ैसला वापस न लिया होता तो बांग्लादेश के फ़िल्म उद्योग से सैकड़ों लोगों की नौकरियां जा सकती थीं.

इस ख़बर पर सरकार की ओर से अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की गई है.

बांग्लादेश के एक प्रतिनिधि अभिनेता रज़्ज़ाक ने बीबीसी को बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने निजी तौर पर ये कहा है कि भारतीय फ़िल्मों के प्रदर्शन पर लगा प्रतिबंध नहीं हटाया जाएगा.

टला प्रदर्शन

रज़्ज़ाक ने कहा कि इस वक्तव्य के बाद पूर्व निर्धारित विरोध प्रदर्शन टाल दिया गया है.

शनिवार को वाणिज्य मंत्री ने सिनेमा मालिकों को राहत देने के लिए भारतीय फ़िल्मों के प्रदर्शन पर लगी रोक हटाने की घोषणा की थी.

बांग्लादेश के फ़िल्म उद्योग के नेताओं ने चेतावनी दी थी कि अगर सिनेमा घरों को भारतीय फ़िल्में दिखाने की अनुमति मिल जाती तो लगभग 25 हज़ार नौकरियां जा सकती थीं.

सन 1972 में स्थानीय फ़िल्म निर्माताओं को बचाने के लिए भारतीय फ़िल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगाई गई थी.

लेकिन सिनेमा मालिकों का कहना है कि बांग्लादेशी फ़िल्में इतनी लोकप्रिय नहीं होतीं, इसीलिए ज़्यादातर लोग अपने घरों पर ही हिंदी फ़िल्में की जाली डीवीडी देखना ज़्यादा पसंद करते हैं.

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