नहीं हटेगा जापान से अमरीकी अड्डा

Image caption प्रधानमंत्री की पार्टी ने चुनाव पूर्व वादे में अड्डे को पूरी तरह से हटाने की बात की थी.

जापान के नए प्रधानमंत्री यूकियो हातोयामा ने कहा है कि ओकिनावा द्वीप पर स्थित अमरीकी सैनिक अड्डे को पूरी तरह से हटाना संभव नहीं होगा.

इस अड्डे के भविष्य को लेकर दोनों देशों के बीच गंभीर तनाव पैदा हो गया है.

पदग्रहण करने के बाद द्वीप की पहली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वो सैनिक अड्डे का कुछ हिस्सा वहां रहने देने के लिए राज़ी हो जाएं.

उनकी डेमोक्रैटिक पार्टी का सत्ता में आने से पहले ये वादा था कि अड्डे को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा.

इस अड्डे का क्या किया जाए इस पर जापान में 1996 से ही बहस चल रही है.

अमरीका ने 1945 में इस जगह पर क़ब्ज़ा किया था लेकिन उसके बाद से वहां के आसपास के शहरों का काफ़ी विस्तार हुआ है.

तनाव

1995 में तीन अमरीकी सैनिकों ने वहां एक बारह-वर्षीय लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार किया जिसके बाद से वहां से अड्डे को हटाने की बहस और तेज़ हो गई लेकिन मामला खिंचता गया.

इसके पहले की सरकार ने अमरीकियों के साथ एक समझौता किया जिसके तहत वो अड्डे के कुछ हिस्सों को द्वीप पर ही एक नई जगह पर ले जा सकेंगे लेकिन उसके बदले अमरीका वहां अपने आठ हज़ार मरीन सैनिकों और उनके परिवारों को वापस बुला लेगा.

लेकिन वर्तमान सत्ताधारी पार्टी ने जब चुनाव के दौरान अड्डे को पूरी तरह से वहां से हटाने की बात की तो अमरीका के साथ उसके संबंधों में तनाव आ गया. कई विश्लेषकों ने तो दोनों देशों के पचास साल से चले आ रहे रणनीतिक रिश्तों पर ख़तरे की बात की.

बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है कि अब लग रहा है कि वर्तमान सरकार स्थानीय विरोध और अमरीका के साथ हुए समझौते के बीच झूल रही है और इसलिए प्रधानमंत्री ने ये बयान दिया है.

लेकिन इस अड्डे को लेकर बहस खत्म हो गई हो ऐसा नहीं दिखता.

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