'बातचीत फ़लस्तीनी राष्ट्र मुद्दे पर हो'

महमूद अब्बास
Image caption महमूद अब्बास ने फ़लस्तीनी राष्ट्र के मुद्दे पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित करने की बात कही है.

फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा है कि फ़लस्तीनियों और इसराइल के बीच होने वाली परोक्ष शांति वार्ता में प्रमुख मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए अन्यथा बातचीत नाकाम हो सकती है.

महमूद अब्बास ने कहा कि फ़लस्तीनियों ने इससे पहले की बातचीत में कम महत्वपूर्ण मुद्दों पर समय बर्बाद होते देखा है.

उन्होंने कहा कि एक फ़लस्तीनी राष्ट्र की सीमाएँ तय करने जैसे प्रमुख मुद्दे पर तुरंत बातचीत होनी चाहिए.

महमूद अब्बास का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमरीकी दूत जॉर्ज मिचेल मध्य पूर्व क्षेत्र के दौरे पर हैं और उन्होंने बुधवार को इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतान्याहू से मुलाक़ात की है.

जॉर्ज मिचेल ने ये मुलाक़ात इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच परोक्ष बातचीत की शुरूआत के एक हिस्से के रूप में की है. शुक्रवार को उनकी मुलाक़ात फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के साथ रामल्लाह में होनी है.

लेकिन फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन ने परोक्ष बातचीत की प्रगति के बारे में अभी कोई राय व्यक्त नहीं की है और कहा है कि शनिवार को बैठक करके इस मुद्दे पर कोई फ़ैसला लिया जाएगा.

उधर महमूद अब्बास ने कहा है कि पूर्वी येरूशलम में यहूदी बस्तियों का विस्तार सबसे बड़ा बाधक मुद्दा बन गया है.

इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच परोक्ष शांति वार्ता मार्च में शुरू होने वाली थी लेकिन फ़लस्तीनी क्षेत्रों में यहूदी बस्तियों के विस्तार के विवाद पर अमरीका और इसराइल के बीच तनाव के बाद इस बातचीत में देरी हुई है.

तनाव के बाद

Image caption मिचेल परोक्ष बातचीत शुरू कराने आए हैं

ओबामा प्रशासन के सलाहकार डेविड एक्सेलरॉड ने इससे पहले कहा था कि येरूशलम का मुद्दा बातचीत के लिए तय किए जाने वाले कार्यक्रम के अंत में आएगा.

इसराइल ने फ़लस्तीनी क्षेत्र पश्चिमी तट और पूर्वी येरूशलम पर 1967 के युद्ध के बाद से ही क़ब्ज़ा कर रखा है. उसका कहना है कि अविभाजित येरूशलम उसकी राजधानी रहेगी जबकि फ़लस्तीनियों की माँग है कि पूर्वी येरुशलम में उनके भावी राष्ट्र की राजधानी बनेगी.

पश्चिमी तट में लगभग 100 यहूदी बस्तियाँ हैं जिनमें लगभग पाँच लाख यहूदी रहते हैं. वहाँ की फ़लस्तीनी आबादी लगभग 25 लाख है.

अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत फ़लस्तीनी क्षेत्रों में यहूदी बस्तियाँ ग़ैर क़ानूनी हैं जबकि इसराइल इसे स्वीकार नहीं करता.

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