डरे हुए हैं न्यूयॉर्क के मुसलमान

मुस्लिम युवा एक बैनर के साथ
Image caption अमरीका में क़रीब दो लाख पाकिस्तानी मूल के लोग रहते हैं

हाल ही में न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर नाकाम कार बम हमले के बाद से अमरीका में रहने वाले मुसलमानों और विशेषकर पाकिस्तानियों में ये डर पैदा हो गया है कि अब कहीं उन्हें निशाना न बनाया जाए.

इस सिलसिले में पाकिस्तानी मूल के अमरीकी नागरिक फ़ैसल शहज़ाद को गिरफ़्तार किया गया है.

उसके बाद से ही अमरीका में रहने वाले बहुत से मुसलमानों को लग रहा है कि शहज़ाद का संबंध मुसलिम समुदाय से है इसलिए कुछ लोग मुसलमानों को भेदभाव या हिंसा का निशाना न बनाएं.

घबराहट

न्यूयॉर्क में स्वयंसेवी संस्था चलाने वाली पाकिस्तानी मूल की एक महिला रुबीना नियाज़ कहती हैं कि टाइम्स स्क्वायर में हुई घटना के बाद वह बहुत घबरा गईं हैं.

रुबीना कहती हैं, "जब मैंने घटना के बारे में सुना तो फ़ौरन ये ख्याल आया कि या अल्लाह कोई मुसलमान या पाकिस्तानी न हो. लेकिन जब बाद में पाकिस्तानी मूल के लड़के की बात सामने आई तो मुझे बहुत धक्का लगा."

रुबीना ने बताया कि उनके पिता भी पाकिस्तानी वायु सेना के अधिकारी थे और उन्हें हैरत है कि पढ़ा-लिखा और अच्छे घर का होने के बावजूद फ़ैसल शहज़ाद ऐसे कामों में कैसे पड़ गया.

दिलासा

Image caption हारून मुग़ल कहते हैं कि लोगों को बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए

इस तरह के डर की भनक पाते ही न्यूयॉर्क के मेयर माईकल ब्लूम्बर्ग ने बयान दिया कि पाकिस्तानियों या मुसलमानों के खिलाफ़ किसी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

माईकल ब्लूम्बर्ग ने कहा, "मैं एक बात साफ़ कर देना चाहता हूँ कि न्यूयॉर्क में रहने वाले किसी पाकिस्तानी या मुसलमान शहरी के ख़िलाफ़ भेदभाव या हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी." उनका कहना था कि कुछ लोग अगर ग़लत राह पर चले जाएं तो पूरे समुदाय को गलत नहीं कहा जा सकता.

'साज़िश'

भारतीय मूल के मुबशिर अहमद पिछले 25 साल से न्यूयॉर्क के लॉन्ग आईलैंड इलाके में रहते हैं.

उनका कहना है, "इस घटना के बाद मुसलमानों में इस समय डर समा गया है कि कहीं उनको फिर से निशाना न बनाया जाने लगे. हमारी तो कोशिश है कि इस देश में रहते हुए अच्छे कामों के ज़रिए देश को आगे बढ़ाएं. लेकिन हमारे खिलाफ़ साज़िश जारी है."

मुबशिर कहते हैं कि जॉर्ज बुश के जाने के बाद उन्होंने सोचा था कि अब मुसलमान लोग इत्मिनान से रह सकेंगे लेकिन बराक ओबामा के अमरीकी राष्ट्रपति बनने के बाद भी 'मुसलमानों को बदनाम करने की कोशिशें जारी हैं.'

'बदलाव की ज़रुरत'

Image caption 9/11 के बाद अमरीका में मुसलमानों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा था

हारून मुग़ल पाकिस्तानी मूल के अमरीकी हैं जो न्यूयॉर्क में 'मैदान' नामक संस्था चलाते हैं. ये संस्था पश्चिम के देशों के साथ मुसलमानों के रिश्ते बेहतर करने के लिए काम करती है.

मुग़ल कहते हैं, "देखिए अमरीका में रहने वाले मुसलमानों को अब बदलना होगा. उन्हे अपने बच्चों पर ज्यादा ध्यान देना होगा. बच्चों को उनके माता-पिता इस्लामिक सेंटर या 'संडे स्कूल' में भेज देते हैं और वहां वह इमाम से कुछ सीख नहीं पाते हैं. तब वह युवा अपने आप ही दूसरे स्रोतों से धार्मिक ज्ञान लेना शुरू करते हैं जो उन्हें कई बार सही नहीं मिलता."

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अमरीका में दो लाख से अधिक पाकिस्तानी मूल के लोग रहते हैं और पिछले वर्ष क़रीब 15 हज़ार पाकिस्तानियों को अमरीका आने का वीज़ा दिया गया था.

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